#ELECTION2019: किसकी होगी DELHI, तय करेगी जनता….

  • सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है जिसमें बीजेपी, आप और कांग्रेस शामिल होंगी
  • 400 से अधिक मतदान केन्द्र की पहचान संवेदनशील के तौर पर की गई है जिनके लिए विशेष सुरक्षा उपाय लागू किये गए हैं

नयी दिल्ली. शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सात लोकसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम गया. प्रचार के आखिरी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली की.

सभी सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है जिसमें बीजेपी, आप और कांग्रेस शामिल होंगी. 400 से अधिक मतदान केन्द्र की पहचान संवेदनशील के तौर पर की गई है जिनके लिए विशेष सुरक्षा उपाय लागू किये गए हैं.

दिल्ली में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार की शुरुआत धीमी रही क्योंकि आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिनों तक जारी रही.

प्रचार में पिछले पखवाड़े में तब तेजी आयी जब वरिष्ठ नेताओं की रैलियों और रोडशो में भारी भीड़ जुटनी शुरू हुई.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दो जनसभाओं को संबोधित किया जबकि उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने शहर में दो रोडशो किये.

BSP सुप्रीमो मायावती, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उनकी पार्टी के मुख्यमंत्रियों योगी आदित्यनाथ, विजय रूपाणी, पेमा खांडू, सरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी और गिरिराज सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया.
प्रचार अभियान के दौरान सिने स्टार हेमा मालिनी, सनी देओल, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर ने विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा.

बीजेपी का प्रचार राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के इर्दगिर्द घूमता रहा जबकि कांग्रेस ने अपने प्रचार में अपनी न्यूनतम आय गारंटी योजना..न्याय पर जोर दिया. आप ने अपना प्रचार दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य की मांग पर केंद्रित रखा.

प्रचार के दौरान आचार संहिता उल्लंघन की कई शिकायतें चुनाव अधिकारियों के सामने आये. दिल्ली में प्रचार थमने से पहले आप और बीजेपी उस अपमानजनक पर्चे को लेकर आपस में भिड़ गए जिसमें आप की उम्मीदवार आतिशी को निशाना बनाया गया था.

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीती थीं और केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तो 2009 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया था और सातों सीटें पार्टी की झोली में दी थी.

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