दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के वकीलों को ड्रेस कोड में दी ढील

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नई दिल्ली, 01 मई (हि.स.). दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली की निचली अदालतों में सुनवाई के लिए वकीलों के ड्रेस कोड में ढील देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतों में वकील बिना कोट, बैंड और टाई के मामलों की सुनवाई के लिए पेश हो सकते हैं.

हाईकोर्ट ने दिल्ली की सभी जिला अदालतों के डिस्ट्रिक्ट जजों और फैमिली कोर्ट के जजों को पत्र लिखकर इस आदेश से अवगत कराया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि वकील सुनवाई के दौरान बिना कोट, बैंड और टाई के पेश हो सकते हैं. हाईकोर्ट ने जिला अदालतों से अति महत्वपूर्ण मामलों में से यथासंभव वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही सुनवाई करने का निर्देश दिया है.

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जो वकील अपने दफ्तर या घर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में हिस्सा लेने में असमर्थ हैं उनके लिए कोर्ट परिसर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की सुविधा उपलब्ध करायी जाए.

हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन मामलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग संभव नहीं है उनमें कोर्ट रुम में सुनवाई की इजाजत दी जाए. कोर्ट रुम में सुनवाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन किया जाए.

हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन मामलों में दलीलें खत्म हो गई हों और फैसला सुरक्षित रखा गया है उनके फैसले सुनाने में प्राथमिकता देनी चाहिए. हाईकोर्ट की ओर से गठित कमेटी ने पाया है कि कामकाज निलंबित होने के बाद फैमिली कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं हुई है. इसलिए फैमिली कोर्ट में सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किया है.

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जिन मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया गया है उनके फैसले सुनाने की प्राथमिकता दी जाए. हाईकोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति के तलाक के मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो.

हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर लॉकडाउन 3 मई से आगे बढ़ता है तो फैमिली कोर्ट आपसी सहमति के तलाक के मामलों और पांच साल से ज्यादा के मामलों में जिनमें अंतिम दलीलें हो गई हो उनको छोड़कर सभी मामलों की सुनवाई स्थगित कर दें.

हाईकोर्ट ने कहा कि कोशिश ये की जानी चाहिए कि जिन मामलों में अंतिम दलीलें पूरी नहीं हुई हैं उनमें पक्षकारों से लिखित दलीलें बिंदुवार ले ली जाएं औऱ उसके बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मौखिक दलीलें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की जाए.

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि रुटीन मामलों के दायर करने की भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन उन मामलों के साथ शर्त होगी कि कोर्ट का सामान्य कामकाज शुरु होने के बाद ही उनकी सुनवाई होगी.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत/जितेन