रक्षामंत्री बोले- पाकिस्तान-चीन से लगी ​7 हजार किमी. की सीमा पर तनाव है

Rajnath Singh
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हमारी उत्तरी और पूर्वी सीमा पर ​पहले ​​पाकिस्तान और अब चीन द्वारा एक मिशन के तहत विवा​​द पैदा किया जा रहा है. इन देशों के साथ हमारी लगभग 7​ हजार किमी​.​ की सीमा मिलती है, जहां आए दिन तनाव बना रहता है​​​​​. ​

उन्होंने कहा कि इतनी समस्याओं के बावजूद प्रधानमंत्री​ नरेन्द्र मोदी​ के भरोसेमंद और दूरदर्शी नेतृत्व में यह देश न केवल इन संकटों का दृढ़ता से सामना कर रहा है​ ​बल्कि सभी क्षेत्रों में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव भी ​किए जा रहे हैं​​​​. ​​​बीआरओ ने इस साल योजनाबद्ध ​तरीके से ​102 पुलों में से 54 को पूरा कर लिया है.
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​रक्षामंत्री सोमवार को बीआरओ द्वारा बनाए गए​ 44​ पुलों का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक साथ उद्घाटन और अरुणाचल प्रदेश में नेचिपु सुरंग के शिलान्यास के अवसर पर​​ संबोधित कर रहे थे​. उन्होंने कहा कि एक साथ इतनी संख्या में पुलों का उद्घाटन और सुरंग का शिलान्यास करना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है.

7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित ये पुल कनेक्टिविटी और विकास के एक नए युग की शुरूआत करेंगे, ऐसी मेरी उम्मीद है​. ​उन्होंने कहा कि आज हमारा देश हर क्षेत्र में कोवि​ड-19 के कारण उपजी अनेक समस्याओं का​ ​समान रूप से सामना कर रहा है​​. वह चाहे कृषि हो या अर्थव्यवस्था, उद्योग हो या सुरक्षा व्यव​​स्था​, ​सभी ​इस ​कारण गहरे प्रभावित हुए हैं​.

राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में राष्ट्र को समर्पित अटल टनल इसका जीता-जागता उदाहरण है. यह न केवल भारत, बल्कि विश्व के इतिहास में यह निर्माण अद्भुत और उत्कृष्ट है. यह टनल हमारी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के साथ ही हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जनजीवन में बदलाव का नया अध्याय है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज राष्ट्र को समर्पित किए गए पुलों से हमारे पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर-पूर्व के दूर-दराज के क्षेत्रों में सैन्य और नागरिक परिवहन में बड़ी सुविधा होगी. हमारे सशस्त्र बलों के जवान बड़ी संख्या में ऐसे क्षेत्रों में तैनात होते हैं जहां पूरे वर्ष परिवहन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि इन पुलों में कई छोटे तो कई बड़े पुल हैं, पर उनकी महत्ता का अंदाजा उनके आकार से नहीं लगाया जा सकता. शिक्षा हो या स्वास्थ्य, व्यापार हो या खाद्य आपूर्ति, सेना की मौलिक आवश्यकता हो या अन्य विकास के काम, उन्हें पूरा करने में ऐसे पुलों और सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और पुलों का लगातार निर्माण आप लोगों की कनेक्टिविटी और सरकार के दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचने के प्रयास को दर्शाता है. ये सड़कें न केवल सामरिक जरूरतों के लिए होती हैं, बल्कि राष्ट्र के विकास में सभी की समान भागीदारी सुनिश्चित करती हैं.

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान भी बीआरओ ने उत्तर पूर्वी राज्यों, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में निरंतर कार्य किया है. दूरदराज के स्थानों पर बर्फ निकासी में देरी न हो, यह सुनिश्चित करते हुए बीआर ने अपना काम सदैव जारी रखा.

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान 2200 किलोमीटर से अधिक सड़कों की कटिंग की गई है. साथ ही लगभग 4200 किलोमीटर लंबी सड़कों की सरफेसिंग की गई है.

उन्होंने कहा कि आज से 5-6 साल पहले तक संगठन का वार्षिक बजट तीन से चार हज़ार करोड़ रुपये हुआ करता था जो इस समय 11 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है. यानी लगभग तीन गुना बढ़ गया है और कोविड-19 महामारी के बावजूद बीआरओ के बजट में कोई कमी नहीं की गई है.

रक्षामंत्री ने कहा कि हमारा हमेशा प्रयास रहा है कि हम देश के विकास में जी-जान से लगे कर्मियों और संगठनों को अधिक से अधिक सुविधा और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराएं.

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत