मानहानि मामला: आखिर क्यों माफी मांगने के लिए तैयार हुए प्रशांत भूषण?

नई दिल्ली, 07 मार्च. प्रशांत भूषण उस ट्वीट के लिए माफी मांगने को तैयार हो गए हैं, जिसमें उन्होंने सरकार पर नागेश्वर राव मामले में कोर्ट को झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया था. अटार्नी जनरल ने कहा कि तब हम भी अवमानना याचिका वापस लेने को तैयार हैं.

तब कोर्ट ने भी कहा कि इस बात पर सुनवाई करेंगे कि लंबित मामलों में वकील किस हद तक बयानबाज़ी कर सकते हैं. कोर्ट ने नागेश्वर मामले में गलत ट्वीट के लिए प्रशांत भूषण की माफी को रिकॉर्ड पर ले लिया.

कोर्ट ने प्रशांत भूषण से पूछा कि आपने जजों को सुनवाई से हटने के लिए कहा है क्या इस पर भी माफी मांगेंगे. तब प्रशांत भूषण ने इससे मना किया. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 29 मार्च को होगी.

गुरुवार सुबह जब सुनवाई शुरू हुई तो वकील प्रशांत भूषण ने अर्ज़ी दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरुण मिश्रा से खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग की लेकिन कोर्ट ने प्रशांत भूषण की इस अर्जी को खारिज कर दिया.

प्रशांत भूषण ने कहा था कि जस्टिस अरुण मिश्रा ने दूसरे केसों में भी हमारे खिलाफ टिप्पणी की है और मुझे लगता है कि उन्होंने हमारे खिलाफ राय बना ली है.

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रशांत भूषण ने नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के बारे में अपने बयानों से लोगों के दिमाग में यह जहर भर दिया है कि केंद्र सरकार ने कोर्ट में फर्जी दस्तावेज दिए.

इसलिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए. अटार्नी जनरल ने कहा कि मैं अपने पहले के रुख पर कायम हूं कि प्रशांत भूषण को सजा नहीं होनी चाहिए लेकिन इसका निपटारा कोर्ट के जरिए ही होना चाहिए.

पिछले 6 फरवरी को कोर्ट ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी किया था. अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि प्रशांत भूषण ने कोर्ट में लंबित केस पर बाहर टिप्पणी की. उन्होंने कहा था कि प्रशांत भूषण ने मुझे झूठा कहा और मुझ पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया.

अटार्नी जनरल की याचिका में कहा गया है कि प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में दावा किया था कि नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति चयन समिति की मंजूरी से नहीं हुई है और इस बारे में अटार्नी जनरल ने कोर्ट को गुमराह किया है.

पिछले 01 फरवरी को सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि नागेश्वर राव ने सीबीआई का अंतरिम निदेशक रहते हुए सीबीआई में 40 तबादले किए.

तब केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सेलेक्शन कमेटी से नागेश्वर राव को अंतरिम सीबीआई निदेशक बनाने को लेकर अनुमति ले ली थी. इसलिए उनकी अथॉरिटी को लेकर कोई सवाल पैदा नहीं होता है.