बिहार में चमकी बुखार का कहर, बच्चों की मौत का आंकड़ा 100 के पार…

नई दिल्ली. बिहार इस समय में भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ जहां गर्मी के कहर से आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं, चमकी बुखार की वजह से बिहार में हर दिन मासूम बच्चों की मौतें हो रही हैं.

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, इस बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 के पार पहुंच गई है. सीएम नीतीश कुमार ने दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है.

इस संकट के समय के बीच आज बिहार में भी डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल हो रहे हैं. राज्य के निजी और सरकारी हॉस्पिटल में ओपीडी सेवा ठप रहेगी. सोमवार को अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सेवा ही बहाल रहेगी.

बिहार के मुजफ्फरपुर में साल दर साल एक ही बीमारी से बच्चे मरते रहे हैं. रोकथाम के नाम पर अमेरिका से जापान तक का दौरा होता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ. इस बार भी जब बच्चों की मौतें जारी हैं, तो स्वास्थ्य विभाग इलाज के बजाय ऊपर वाले के रहम पर भरोसा कर रहा है.

चमकी बुखार के रोकथाम को लेकर अब तक जो भी कोशिशें की जा रही हैं वो नाकाम साबित हो रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पूरी टीम के साथ रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे और डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए कहा कि अस्पताल पूरी कोशिश कर रहा है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बीमारी के प्रकोप पर चिंता जाहिर की थी. हर्षवर्धन के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी मौजूद थे.

चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं. वहीं चमकी बुखार की आंच अब मोतिहारी तक पहुंच गई है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है.

क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?

एक्यूट इंसिफेलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसिफेलाइटिस को उत्तरी बिहार में चमकी बुखार (Chamki fever) के नाम से जाना जाता है. इससे पीड़ित बच्चों को तेज बुखार आता है और शरीर में ऐंठन होती है. इसके बाद बच्चे बेहोश हो जाते हैं.

मरीज को उलटी आने और चिड़चिड़ेपन की शिकायत भी रहती है. बीमारी अगर बढ़ जाए तो ये लक्षण नजर आते हैं.बिना किसी बात के भ्रम पैदा होने लगता है.

दिमाग संतुलित नहीं रहता है. पैरालाइज हो जाना और मांसपेशियों में कमजोरी आना. देखा जाता है कि रोगी को बोलने और सुनने में समस्या आती है.

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नई दिल्ली. बिहार इस समय में भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ जहां गर्मी के कहर से आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं, चमकी बुखार की वजह से बिहार में हर दिन मासूम बच्चों की मौतें हो रही हैं.

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, इस बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 के पार पहुंच गई है. सीएम नीतीश कुमार ने दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है.

इस संकट के समय के बीच आज बिहार में भी डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल हो रहे हैं. राज्य के निजी और सरकारी हॉस्पिटल में ओपीडी सेवा ठप रहेगी. सोमवार को अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सेवा ही बहाल रहेगी.

बिहार के मुजफ्फरपुर में साल दर साल एक ही बीमारी से बच्चे मरते रहे हैं. रोकथाम के नाम पर अमेरिका से जापान तक का दौरा होता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ. इस बार भी जब बच्चों की मौतें जारी हैं, तो स्वास्थ्य विभाग इलाज के बजाय ऊपर वाले के रहम पर भरोसा कर रहा है.

चमकी बुखार के रोकथाम को लेकर अब तक जो भी कोशिशें की जा रही हैं वो नाकाम साबित हो रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पूरी टीम के साथ रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे और डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए कहा कि अस्पताल पूरी कोशिश कर रहा है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बीमारी के प्रकोप पर चिंता जाहिर की थी. हर्षवर्धन के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी मौजूद थे.

चमकी बुखार से पीड़ित मासूमों की सबसे ज्यादा मौतें मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में हुई हैं. वहीं चमकी बुखार की आंच अब मोतिहारी तक पहुंच गई है, जहां एक बच्ची बुखार से पीड़ित है.

क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?

एक्यूट इंसिफेलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसिफेलाइटिस को उत्तरी बिहार में चमकी बुखार (Chamki fever) के नाम से जाना जाता है. इससे पीड़ित बच्चों को तेज बुखार आता है और शरीर में ऐंठन होती है. इसके बाद बच्चे बेहोश हो जाते हैं.

मरीज को उलटी आने और चिड़चिड़ेपन की शिकायत भी रहती है. बीमारी अगर बढ़ जाए तो ये लक्षण नजर आते हैं.बिना किसी बात के भ्रम पैदा होने लगता है.

दिमाग संतुलित नहीं रहता है. पैरालाइज हो जाना और मांसपेशियों में कमजोरी आना. देखा जाता है कि रोगी को बोलने और सुनने में समस्या आती है.

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