आधुनिक युग की मीरा थीं महादेवी वर्मा, जानिए उनके बारे में कुछ खास

महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य का ऐसा नाम है.जो किसी परिचय मोहताज नहीं है. हिंदी सहित्य में उनका नाम बेहद अदब और सम्मान के साथ लिया जाता है. महादेवी वर्मा ने हिंदी सहित्य में स्त्री की पीड़ा को खूब दर्शाया .

अपने लेखन के माध्यम उन्होंने महिलाओं की परेशानियों को इस कदर सामने रख दिया जैसे वो सब उनका स्ंवय किया अनुभव हो. आज के ही दिन इस दुनिया को महादेवी ने अलविदा कहा था. साल 1987 में इलाहाबाद में महादेवी वर्मा का निधन हो गया था

महादेवी वर्मा को इन पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

  • महादेवी वर्मा को सन् 1934 जिसमें सेकसरिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • सन् 1942 में द्विवेदी पदक से किया गया सम्मानित
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982)
  • साहित्य अकादमी फेलोशिप (1979)
  • पद्म भूषण (1956)
  • भारत भारती पुरस्कार (1943)
  • मंगला प्रसाद पुरस्कार (1943)
  • पद्म विभूषण (1988) आदि शामिल है.

आधुनिक युग की मीरा थीं महादेवी वर्मा

वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख में से एक मानी जाती हैं. आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है.

कवि निराला ने उन्हें सरस्वती कहा

कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है. महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी वे उन कवियों में से एक हैं.

उनके काव्य में महिलाओं की सारी पीड़ा झलकती है

जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की. न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे.

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