बाल आयोग ने PUBG जैसे गेम पर बोला ये…

आजकल ज्यादातर बच्चों को घर के अंदर रहकर वीडियो गेम पर वक्त बिताना पसंद आता है. कंप्यूटर गेम्स को युग में बच्चों का घर से बाहर निकलकर पड़ोसी बच्चों के साथ खेलना अब बंद ही हो गया है.

आज के समय में फिजिकल एक्टिवीटी करना बहुत जरूरी हो गया है. इसी संबंध में दिल्ली बाल संरक्षण आयोग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है.

आयोग ने नई दिल्ली म्यूनिसिपल काउंसिल के डायरेक्टर एजूकेशन को नोटिफिकेशन जारी किया है. इस नोटिफिकेशन में कंप्यूटर गेम्स से होने वाले दुष्प्रभावों और लक्षणों के बारे में बताया गया है.

यह लेटर पैरेंट्स के लिए जारी किया गया है. दिल्ली बाल संरक्षण व अधिकार आयोग (डीसीपीसीआर) ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय सहित नॉर्थ एमसीडी, साउथ एमसीडी, ईस्ट एमसीडी, एनडीएमसी को नोटिस जारी किया है.

इस नोटिस में कहा गया है कि वे स्कूली बच्चों को ऑनलाइन गेम के दुष्प्रभाव से बचाने के बाबत प्रयास करें. बाल आयोग ने पबजी, फोर्टनाइट, ग्रैंड थेफ्ट ऑटो, गॉड ऑफ वॉर, हिटमैन और पॉकेमोन जैसे वीडियो व ऑनलाइन गेम को बच्चों के लिए नुकसानदेह बताया है. 

बाल आयोग के मुताबिक इन खेलों व वीडियो के जरिये बच्चों के दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. आयोग ने लेटर में ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है जो बच्चों में पाए जाते हैं.

यह हैं लक्षण

– जब बच्चे परिवार और दोस्तों से दूर होने लगें

– लगातार खराब मूड में रहना और नाखुश रहना

– बार-बार परेशान दिखना, दिन भर होने वाले आम कार्यों से दूर रहना

– स्वयं पर अचानक गुस्सा आना

– पहले खुशी देने वाली गतिविधियों से दूर होना

नेगेटिव इंपैक्ट से बच्चों को ऐसे बचाएं

– बच्चों से पूछें उन्हें किसी प्रकार का कोई स्ट्रेस या चिंता तो नहीं है. अगर बच्चे आपसे अपनी कोई परेशानी साझा कर रहे हैं तो उनसे बातचीत करें.

– बच्चों की हरकतों और गतिविधियों पर नजर रखें. उन्हें आक्रामक वीडियो गेम खेलने में अधिक टाइम तक न देने दें.

– बच्चे अगर अचानक मोबाइल और गेमिंग डिवाइस पर अधिक समय देने लगें तो सतर्क हों.

– आपके सामने जाते ही बच्चे फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन को बदल दें, नजर रखें.

– गेम खेलने के बाद अगर बच्चे गुस्सा या नाखुश हों तो उनसे प्यार से बात करें. परेशानी समझने की कोशिश करें.

– पैरेंट्स स्कूल के काउंसलर से बात कर सकते हैं. हर थोड़े दिन में बच्चों और पैरेंट्स से डिसकशन जरूर करें.

– अगर बच्चों पर अधिक प्रभाव दिखे तो प्रोफेशनल हेल्प लेने से भी न डरें.

– बच्चों को हमेशा इस बात का भरोसा देते रहें कि आप उनके साथ हैं.

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