बच्चों की मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रहा है लॉकडाउन, इस तरह करें देखभाल

rr
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on whatsapp
WhatsApp

नई दिल्ली. भारत में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. कोरोनावायरस महामारी ने देश-दुनिया को प्रभावित किया है. हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक, लॉकडाउन के बाद भारतीयों की मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ है. कम से कम हर पांच में से एक भारतीय मानसिक बीमारी से जूझ रहा है. सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे हो रहे हैं.

ऐसे में हर तरफ लोग इसको लेकर चिंतित हैं. इसका असर बच्‍चों की मानसिक दशा पर भी पड़ रहा है. बच्चों के मन में नकारात्मक विचार घर कर रहे हैं. ऐसे में इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्‍योंकि धीरे-धीरे ये तनाव गहरे अवसाद का रूप ले सकता है.

स्कूल-कॉलेज बंद होने और अन्य बंदिशों के कारण बच्चों की जिंदगी सिमट सी गई है. निराशा और दबाव को बच्चे झेल नहीं पा रहे हैं. यहां तक कि वे आत्महत्या जैसा कठोर कदम तक उठाने लगे हैं.

एक जगह लगातार रहना, दोस्‍तों, स्‍कूल से दूरी बच्‍चों में तनाव के कारण बन रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस का डर भी उनके तनाव को बढ़ा रहा है. इससे वो अपनी पढ़ाई में मन नहीं लगा पा रहे. ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू हो गई है, पर कुछ बच्चों का ध्यान इन पर नहीं लग पा रहा है.

अभी वैसे तो ज्यादातर स्‍कूल बंद हैं और कई स्‍कूलों की ओर से बच्‍चों की ऑनलाइन क्‍लासेज शुरू की गई हैं. लेकिन कुछ बच्‍चों का पढ़ाई में मन न लगना इस बात का संकेत हो सकता है कि वे कहीं न कहीं मानसिक तौर पर डिस्‍टर्ब हैं.

वो कहीं न कहीं किसी बात को मन में दबाकर बैठे हैं. ऐसे बच्चे जो चुपचाप रहने लगे हैं, या किसी भी बात को कह नहीं पा रहे हैं, वो भी अवसाद में जा सकते हैं. इन बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. बच्‍चे किसी तरह प्रभावित न हों, ये ध्‍यान रखने की जरूरत पेरेंट्स को है.

बच्‍चों की दिनचर्या में भी बदलाव हुआ है. उनके सोने, खाने का समय बदला है. वे देर तक सोने या किसी भी समय सोने, खाने के आदी हो रहे हैं. जिसेक चलते जहां पर उनकी हेल्थ प्रभावित हो रही है, वहीं उनमें नींद पूरी तरह नहीं आने जैसी समस्‍याएं भी पनपने लगी हैं. बाहर जाते थे तो शारीरिक रूप से एक्टिव रहते थे पर लॉकडाउन के कारण घर पर ही रहना पड़ रहा है तो टीवी, फोन, या गेम यही उनकी दिन चर्या का हिस्सा बनता जा रहा है.

अभिभावकों को परिवार की जिम्मेदारी के साथ बच्चों की भी चिंता करनी है. बच्चे का व्यवहार अचानक से बदले तो सतर्क होना होगा. बच्चा चुपचाप रहने लगे. खाना न खाए. छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ाने लगे या बहुत अधिक गुस्सा करने लगे, उसके भीतर नकारात्मक विचार आने लगें तो बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लें. जरा सी चूक या लापरवाही बच्चे के जीवन पर भारी पड़ सकती है. बच्चों के साथ बात करें उससे बातों में बातों में जानने की कोशिश करें. बच्चों के साथ इनडोर गेम खेलें.