पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने हरियाणा सरकार को घेरा

randeep singh surjewala
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कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में वृद्धि करने को लेकर हरियाणा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह समय वसूली और लूट का नहीं बल्कि जनता को छूट देने का है. विपक्षी पार्टी ने कहा कि रात के अंधेरे में खट्टर सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर जनता पर बोझ लादने का काम किया गया है. वो भी उस वक्त जब पूरा देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है और जनता लॉकडाउन के बीच रोजी-रोटी को लेकर संघर्षरत है.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला एवं हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाने का फैसला कर लोगों की परेशानी बढ़ी दी है.

उन्होंने कहा कि एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें लगातार कम हो रही हैं और तेल कंपनियों ने भी पिछले 40 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं. ऐसे में फिर राज्य सरकार को वसूली की क्या जल्दी पड़ी थी कि उन्होंने वैट लगाकर लोगों की कमर तोड़ने का काम किया है.

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने कहा कि राज्य सरकार ने बस का किराया भी 15 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से बढ़ाने का  फैसला किया है. साधारण लग्जरी और सुपर लग्जरी बसों का किराया 85 पैसे प्रति यात्री प्रति किमी से बढ़ाकर एक रुपये प्रति यात्री प्रति किमी कर दिया गया है, ताकि बसों के संचालन की बढ़ती लागत को आंशिक रूप से पूरा किया जा सके. इसके अलावा सब्जी व फल मंडियों पर भी मार्केट फीस को दो प्रतिशत कर दिया है. जबकि वर्ष 2014 के समय कांग्रेस सरकार में यह फीस हटा दी गई थी.

उन्होंने पूछा कि आखिर संकट की इस घड़ी में सरकार किस प्रकार से लोगों को राहत पहुंचाने का काम कर रही है. क्या जनता के प्रति राज्य सरकार की यही जवाबदेही है. सुरजेवाला ने कहा कि दुनियाभर की सरकारें आज अपने लोगों को राहत देते हुए उनकी जेब में पैसे डालने का काम कर रही हैं लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार लोगों की जेब से पैसे काटने में लगी है.

उन्होंने कहा कि पिछले छह साल में हरियाणा की बीजेपी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर 42 हजार करोड़ रुपये कमाए हैं. साथ ही 1668 करोड़ रुपये रिफाइनरी पर जीएसटी से भी सरकार ने वसूले हैं. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार के इस फैसले से पेट्रोल और डीजल के मूल्य में वृद्धि का असर अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति और उपलब्धता पर भी पड़ेगा.

दोनों नेताओं ने कहा कि अगर राज्य सरकार के पास धन की कमी है तो भी अन्य प्रदेशों की तरह केंद्र से क्यों नहीं मांग करते. आखिर हरियाणा का भी तो जीएसटी भुगतान लंबित है. अगर केंद्र सरकार से जीएसटी की वह राशि राज्य को मिलती है तो प्रदेशवासियों को सरकार कर वाले चाबुक से राहत मिल सकेगी.

हिन्दुस्थान समाचार/आकाश