अनुभव बड़ा या जवानी-गहलोत या पायलट, राजस्थान-सीएम का फेस कौन?

राजस्थान में कांग्रेस के सीएम फेस के लिए दो बड़े नामों की चर्चा है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट. गहलोत जहां पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चहेतों में एक रहे, वहीं सचिन पायलट को प्रदेश का नेतृत्व देकर राहुल गांधी ने उन पर भरोसा जताया है.
क्यों गहलोत का पलड़ा है भारी?
गहलोत प्रदेश के पॉपुलर नेताओं में है. वे दो बार राजस्थान मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी खास पकड़ है. मुख्यमंत्री होने का उनका अनुभव एक बार फिर इस कुर्सी के लिए उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है.
गहलोत ने अपने राजनिति के सफर की शुरूआत अपने कॉलेज से ही शुरू कर दी थी. 1980 में गहलोत ने पहली बार जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता था. अशोक गहलोत इंद्रा सरकार मे केंद्रीय मंत्री भी रह चुके है. अशोक गहलोत के नेतृत्व में पार्टी ने दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का परचम लहराया है.
गहलोत राजनिति में राजीव गांधी के खास करीबियों में से एक है, वहीं वो राहुल गांधी की भी पहली पसंद बने हुए है. राज्य में सीएम पद के लिए राजस्थान में अशोक गहलोत को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
अशोक गहलोत साधारण व्यक्तिव वाले मजबूत नेता है. गहलोत 1973 से 1979 में कांग्रेस के छात्र संगठन, एनएसयूआई के राजस्थान प्रेसिडेंट भी रहे. गहलोत ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी.वी.नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में केन्द्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया.
अशोक गहलोत पहली बार 1 दिसबंर 1998 में को मुख्यमंत्री बने और पांच साल तक कांग्रेस सरकार चलाई. इसके बाद 2008 में फिर कांग्रेस को सत्ता मिली और इस बार गहलोत ही दूसरी बार मुख्यमंत्री बने. राहुल ने अब उन्हें महासचिव बनाकर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी है.
गहलोत की दावेदारी भी सिर्फ़ कांग्रेस के संगठन तक सीमित नहीं है. प्रदेश में आज भी वे कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस उनकी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश कर सकती है.
क्यों है सचिन की भी दावेदारी
सचिन पायलट उनके मुकाबले राजनिति के मैदान में काफी युवा है. सचिन पायलट राजस्थान में युवाओं की पहली पसंद है. सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे है.
कांग्रेस में राजेश पायलट का कद भी काफी बड़ा था. अपने पिता की विरासत को सम्भालते हुए सचिन पायलट कांग्रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं. सचिन पायलट ने अपनी पढाई विदेश से की है.
सचिन पायलट की शुरूआती शिक्षा नई दिल्ली एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से हुई है. उन्होंने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से पूरी की है. जिसके बाद आगे की पढाई करने के लिए सचिन अमेरीका चले गए. सचिन पायलट देश के सबसे युवा सांसद हैं. सचिन पायलट ने साल 2004 में दौसा लोकसभा सीट से जीत हासिल की.
वहीं साल 2009 में वह अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्होंने फिर जीत हासिल की. जबकि साल 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सचिन पायलट मनमोहन सरकार में केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भी रह चुके हैं. सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं, जो राजस्थान की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है.
अभी तक इस समुदाय से कोई भी व्यक्ति राजस्थान का मुख्यमंत्री नहीं रहा है. इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना सकती है.सचिन पायलट को उनके समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी के रूप में पेश किया. सचिन पायलट के राज्य के युवाओं की पहली पसंद है इसमें कोई दोराय नही है.
राज्य में सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी ने पिछले दो वर्षों के भीतर हुए उप-चुनावों बेहतरीन प्रदर्शन किया है. जिसकी वजह से कांग्रेस को कई सीटों पर जीत मिली. सचिन पायलट जैसे युवा को मौका देकर राज्य में युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश करे इसकी सम्भावना कम ही है.

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