अजीत डोभाल को यूं ही नहीं कहते मोदी का ‘ब्रम्हास्त्र’, ड्रैगन को पीछे हटाने में निभाई अहम भूमिका

पीएम मोदी के पास एक ऐसा ब्रम्हास्त्र जिसे उन्होंने जब भी इस्तेमाल किया, सफल होकर ही लौटा. मोदी के इस ब्रम्हास्त्र का नाम है अजीत डोभाल. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के सिर्फ नाम से ही पाकिस्तान कांप जाता है. अब उनके दमखम का चीन भी कायल हो चुका है.

भारत में दहशत फैलाने वाले आतंकियों को पाक में घुसकर मारने का श्रेय किसी और को नहीं बल्कि डोभाल को ही जाता है. वो डोभाल ही थे, जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की प्लानिंग की थी. और अब LAC पर चीन को झुकाने में भी डोभाल का काफी अहम योगदान है.

 डोभाल ने कल (रविवार को) चीनी विदेश मंत्री और राज्य के काउंसलर वांग यी के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत की थी. इस बातचीत के बाद ही चीनी सेना आज (सोमवार को) विवादित क्षेत्र से 2 किमी पीछे हटने पर राजी हो गई है. जानकारी के मुताबिक डोभाल ने वांग यी से इस विवाद का शांतिपूर्वक हल निकालने की बात कही थी.

डोभाल ने वांग को साफ शब्दों में कहा था कि विवाद को बढ़ाने से कोई फायदा नहीं होने वाला है. इससे संबंध खराब होंगे जिससे दोनों देशों का नुकसान होगा. दोनों के बीच हुई बातचीत में स्थिरता, शांति और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने पर चर्चा हुई.

इस बातचीत के बाद ही चीनी सैनिकों ने गलवान, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से भी अपने कैंप पीछे हटाए हैं. हालांकि चीनी भारी बख्तरबंद वाहन अभी भी गलवान नदी क्षेत्र में गहराई वाले क्षेत्रों में मौजूद हैं. गलवान घाटी को अब बफर जोन बना दिया गया है ताकि आगे फिर से कोई हिंसक घटना न हो.

अजीत डोभाल को पीएम मोदी जब भी जो जिम्मेदारी सौंपते हैं, वो उसमें सफल होते हैं. पाक में बैठे आतंकियों को खत्म करना हो या जम्मू-कश्मीर से आतंक को समाप्त करना, डोभाल की सटीक प्लानिंग हमेशा सफल रही है. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद राज्य में हिंसा फैलने की आशंका थी, लेकिन डोभाल ने इसे बड़ी अच्छी तरह से मैनेज किया था.

दिल्ली हिंसा के वक्त जब दंगाईयों के आगे दिल्ली पुलिस फेल होती साबित हो रही थी, तब डोभाल ने कमान संभाली थी. उन्होंने जैसे ही दिल्ली की सड़कों पैदल हालात का जायजा लिया. दंगाई अपने-अपने घरों में छिप गए. और दंगे शांत हो गए. इसीलिए अजीत डोभाल को पीएम मोदी का ब्रम्हास्त्र कहा जाता है. जिसे मोदी तब इस्तेमाल करते हैं, जब कोई विकल्प नहीं बचता है.

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