भारत ने बढ़ाया परमाणु जखीरा लेकिन चीन और पाकिस्तान फिर भी है आगे

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भारत परमाणु हथियारों से संपन्न देश है लेकिन अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक ने हैरान कर देने वाली जानकारी दी है. अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक के मुताबिक चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) दोनों के परमाणु हथियारों का जखीरा, भारत से ज्यादा है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भारत के परमाणु हथियारों के जखीरे में पिछले साल 10 और हथियार जुड़े हैं.

चीन और पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार हैं. यह दावा हम नहीं बल्कि स्वीडन के इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में किया गया है. स्वीडन (Sweden) के थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (stockholm international peace research institute) की इस रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वक्त में चीन के पास 320 और पाकिस्तान के पास 160 परमाणु हथियार हैं. वहीं भारत के पास 150 परमाणु हथियार हैं. SIPRI रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीन बहुत तेजी से परमाणु हथियार बना रहा है. हालांकि भारत और पाकिस्‍तान ने भी प‍िछले एक साल में परमाणु हथियारों की संख्‍या को बढ़ाया है.

इस रिपोर्ट में उन देशों का जिक्र है, जिनके पास आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक- दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है. दोनों देश पुराने हथियारों को खत्म कर रहे हैं. यही वजह है कि पिछले साल एटमी हथियारों की संख्या में कमी देखी गई. हालांकि, फिक्र की बात यह है कि पुराने की जगह यह दोनों देश नए एटमी हथियार बना रहे हैं.

वहीं बात करें भारत के परमाणु हथियार की तो वो चीन और पाकिस्तान दोनों से कम हैं. बल्कि भारत के पास तो चीन के आधे से भी कम परमाणु हथियार हैं. अब ऐसे में सवाल उठता है कि एक तरफ जहां दुनियाभर के ज्यादातर देश मुद्दे सुलझाने के लिए बातचीत का जरिया चुनते हैं तो वहीं, भारत के दोनों पड़ोसी परमाणु हथियार के निर्माण में क्यों दिलचस्पी रखते हैं. क्या दोनों देश शांति के पक्षधर नहीं हैं?

भारत की है No first use नीति

भारत एक जिम्मेदार देश है और वह अपने परमाणु हथियारों को किसी देश के खिलाफ “पहले इस्तेमाल” नही करेगा. भारत की परमाणु नीति का मूल सिद्धांत “No first use” है. इस नीति के अनुसार भारत किसी भी देश पर परमाणु हमला तब तक नही करेगा जब तक कि शत्रु देश भारत के ऊपर हमला नही कर देता.

किसी देश ने भारत पर परमाणु हमला किया तो उसका प्रतिशोध इतना भयानक होगा कि दुश्मन पूरी तरह से बरबाद हो जाएगा और वह जल्दी इस हमले से उबर भी नहीं पाएगा. भारत के पास तीनों मोर्चों से परमाणु हमला लड़ने की क्षमता है यानी भारत जमीन, आसमान और समुद्र तीनों में परमाणु युद्ध लड़ने में सक्षम है.

आज अगर चीन और पाकिस्तान, भारत पर कोई बड़ा हमला करने से कतराता है तो इसका श्रेय तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के उस फैसले को भी जाता है जिसने भारत को दुनिया में एक परमाणु शक्ति के तौर पर स्थापित कर दिया था. जब भारत ने ये परीक्षण किया था तो चीन इस कदर चिढ़ गया था कि चीन ने अमेरिका के साथ मिलकर UNSC में भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करवाया था.

1998 अठानवे में जब भारत ने अपने आप को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया, भारत की परमाणु रक्षा ने इसे आश्वस्त कर दिया कि चीन और पाकिस्तान के परमाणु हथियार का मुकाबला कर सकता है. उसी समय से भारत लगातार यह प्रयास करता रहा है कि इसकी परमाणु रक्षा मजबूत हो सके. इसके लिए इसने परमाणु प्रक्षेपण यंत्रों की तकनीकी सुधार और उनकी मारक क्षमता को बढ़ाने पर लगातार ध्यान दिया है.

अपने परमाणु प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देने के लिए इसने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, समुद्र आधारित परमाणु वेक्टर, सीमित बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम, मल्टीपल री-एंट्री लांच व्हीकल (एमआईआरवी) और व्यापक कमांड और कंट्रोल तंत्र पर काफी काम किया है. परमाणु रक्षा के अचूक और विश्वसनीय होने में इस तकनीकी विकास का अहम योगदान है. दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि इन तकनीकों ने ही परमाणु रक्षा के लिहाज से वैश्विक यथास्थिति को बहाल रखा है.

आखिर में हम बस यही कहेंगे कि जरा सोचिए कि क्या परमाणु बम-संपन्न देश युद्ध का खतरा उठा सकते हैं? जंग तो ख़ुद ही एक मसला है, जंग क्या मसलों का हल देगी.