मुख्यमंत्री गहलोत के एक के बाद एक ट्वीट से मची सियासी हलचल

गहलोत ने पहली बार कहा- लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी हम सबकी

जयपुर. लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटें गंवाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के पूर्व पहली बार स्वीकारा कि पराजय की जिम्मेदारी हम सबकी है. गहलोत ने लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार की जिम्मेदारी ली.

गहलोत ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए. इसमें उन्होंने साफ कर दिया कि वर्तमान परिस्थिति में राहुल ही पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं. देश के प्रति जो उनकी निष्ठा है, वह बेमिसाल है. यह बात अलग है कि गहलोत के बयान के इतर राहुल इस्तीफा वापस नहीं लेने पर अड़े हुए हैं. अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश के बाद राहुल की कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार को पहली बैठक हुई है. इस बैठक से पहले गहलोत ने राहुल पर पूरा भरोसा जताया है.

पार्टी अध्यक्ष के साथ बैठक से पहले गहलोत ने अपने टवीट् में कहा कि इस बैठक के जरिए कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्री अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं. हमारा दृढ़ मत है कि मौजूदा परिस्थिति में केवल राहुल ही पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं. देश व नागरिकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बेमिसाल है.

गहलोत ने कहा कि इसके पहले भी हम सभी यह कह चुके हैं कि हम राहुल के साथ हैं और लोकसभा चुनाव में मिली हार की हम जिम्मेदारी लेते हैं. लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि कई मोर्चों पर मोदी सरकार की नाकामी के बावजूद कांग्रेस की हार देखना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.

उन्होंने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा कि भाजपा अपने उन्मादी राष्ट्रवाद के पीछे अपनी नाकामियों को छिपाने में कामयाब हो गई, लेकिन इन सबके बीच यह बात किसी से छिपी नहीं कि विपक्ष में से केवल कांग्रेस अध्यक्ष ने ही मुद्दा आधारित चुनाव बनाने का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और भाजपा को चुनौती दी.

उल्लेखनीय है कि राहुल के अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश के बाद राजस्थान से अब तक प्रदेश सहप्रभारी और राष्ट्रीय सचिव तरुण कुमार ने ही इस्तीफा दिया है. प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, सह प्रभारी विवेक बंसल, पीसीसी चीफ सचिन पायलट सरीखे नाम पद छोड़ने के लिए मन नहीं बना पा रहे हैं.

वहीं गहलोत ने सोमवार को नई दिल्ली में कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणामों के तुरंत बाद ही उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी थी. इस पर अब केन्द्रीय नेतृत्व को फैसला करना है. हालांकि माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री से इस्तीफा नहीं लिया जाएगा, लेकिन अन्य पदों से इस्तीफा लेकर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद की जा सकती है.

राज्य विधानसभा चुनाव में 200 में से 100 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई, लेकिन इसके कुछ महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में 25 सीटों पर पार्टी को करारी हार मिली. लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी. वे अपने इस्तीफे पर अब भी अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि यह पद गांधी परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को दिया जाना चाहिए.

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर/पी.के.

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