लीची खाने से फैलती है चमकी बुखार जैसी खतरनाक महामारी!
  • इंडिया एपिडमिक इंटेलीजेंस सर्विस के डॉक्टर्स ने जो खुलासा किया वो चौकाने वाला है. रिपोर्ट में बीमारी की कई वजहों में लीची को भी बताया गया.
  • बुखार बच्चों को बेहोश कर देता है और दौरे पड़ने लगते हैं. इस बुखार में इतनी ताकत होती है कि ये बच्चों को कोमा में भेज देता है.

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में घातक दिमागी ( #ChamkiFever ) बुखार से अब तक 83 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. इस बीमारी ने एक ही दिन में एक ही जिले मुजफ्फरपुर में 25 बच्चों को निगल लिया. इस घातक बीमारी से पार पाने लिए डॉक्टर्स की टीम लगातार प्रयास कर रही है. ये बीमारी 1995 से बच्चों को निगल रही है, पर अभी तक इसका सफल इलाज खोजा नही जा सका है.

लीची खाने से फैलता है संक्रमण ! –

हर साल मई और जून में इस बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला जारी हो जाता है. और लीची की फसल रहने तक मौते जारी रहती हैं. अटकलें लगाई जा रही हैं कि कहीं ये मौतें लीची खाने से तो नही हो रही हैं. इस बीमारी का असल नाम इंसेफलाइटिस है. पर बिहार में इसे #ChamkiBukhar के नाम से जाना जाता है.

इंडिया एपिडमिक इंटेलीजेंस सर्विस के डॉक्टर्स ने जो खुलासा किया वो चौकाने वाला है. रिपोर्ट में बीमारी की कई वजहों में लीची को भी बताया गया. कहा गया कि खाली पेट लीची खाने से बच्चों में इससे संबन्धित संक्रमण हो जाते हैं और फिर बुखार आने लगता है. लासेंट ग्लोबल भी इस रिपोर्ट को छापते हुए लिखता है कि लीची से ये रोग होता है.

बीमारी की शुरूआत कैसे होती है-

इस बीमारी की शुरुआत तेज बुखार आने से होती है, जिससे कम उम्र के बच्चों के शरीर में ऐंठन होने लगती है. बुखार बच्चों को बेहोश कर देता है और दौरे पड़ने लगते हैं. इस बुखार में इतनी ताकत होती है कि ये बच्चों को कोमा में भेज देता है. ब्लड का शुगर बढ़ जाता है. इस बीमारी का कहर मई से अक्टूबर तक जारी रहता है.

एक्सपर्ट अभी तक इस बीमारी का सही कारण पता नही लगा पाए हैं. वो इस बीमारी की असली वजह की तलाश कर रहे हैं. 2014 में भी लगभग 120 से ज्यादा बच्चों की दिमागी बुखार से मौत हुई थी. पर प्रशासन इससे सीख नही ले पाया.

क्या है पूरा मामला-

बिहार में इस समय चमकी बुखार का प्रकोप अपने चरम पर है. जब तक सरकार की आंखे खुलीं, तब तक इस बुखार से पीड़ित 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई. बहुत से बच्चे अभी भी SKMCH अस्पताल में जिन्दगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.

अस्पताल के सभी पीआईसीयू यूनिट भरे हुए हैं. बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती चली जा रही है. इस बीमारी ने अब कर सैकड़ों बच्चों को निगल लिया है. सभी बच्चों की उम्र 4 से 15 साल के बीच बताई जा रही है. इस बीमारी का प्रकोप उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, वैशाली में जारी है. नीतीश कुमार का कहना है कि बुखार से बच्चों की मौत का मामला गंभीर है.

बीमारी के लक्षण –

मांसपेशियों में कमजोरी, बोलने और सुनने में समस्या, बेहोशी आना, बिना किसी बात के भ्रम उत्पन्न होना, दिमाग संतुलित न रहना, पैरालाइज हो जाना. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर ऐसे किसी भी प्रकार के लक्षण मरीज में हैं तो उसको तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.

मधुकर वाजपेयी / Madhukar Vajpayee

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