केंद्र और असम सरकार ने NRC को लेकर सुप्रीम कोर्ट से की ये अपील….

नई दिल्ली. केंद्र और असम सरकार (Asam Government) ने सुप्रीम कोर्ट में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में गलत तरीके से नागरिकों को जोड़ने और हटाने के आरोप लगाते हुए अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की है.

केंद्र ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता.

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा कि कोर्ट 31 जुलाई की डेडलाइन में बदलाव करे. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 23 जुलाई को सुनवाई करेगा.

अभी कुछ ही दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स (NRC) को लेकर केंद्र और असम सरकार द्वारा दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था.

सबसे पहले छह दिसंबर, 2013 को केंद्र सरकार ने पहली अधिसूचना जारी कर तीन साल में NRC बनाने का कार्य पूरा करके उसे प्रकाशित करने की घोषणा की थी. इसके बाद से अभी तक समय सीमा को छह बार बढ़ाया जा चुका है.

केंद्र और राज्य सरकार ने एनआरसी में शामिल नागरिकों के नमूने के सत्यापन का भी अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ लगते जिलों में स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण लाखों लोगों को गलत रूप से असम एनआरसी में शामिल किया गया है.

पिछले 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी की प्रक्रिया पूरा करने की तारीख 31 जुलाई से आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने प्रतीक हजेला से कहा था कि आप 31 जुलाई से एक दिन पहले ये काम पूरा करें लेकिन एक दिन देर से नहीं.

सुनवाई के दौरान प्रतीक हजेला की तरफ से कहा गया था कि आपत्तियों पर सुनवाई 6 मई से शुरु हुई है. बहुत से मामलों में आपत्ति दर्ज करानेवाले उपस्थित नहीं हो रहे हैं. तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि अगर वे नहीं उपस्थित हो रहे हैं तो कानून अपना काम करेगा.

केंद्र ने कहा कि गलत तरीके से कुछ लोगों को शामिल किए जाने और कुछ लोगों को उससे बाहर रखे जाने का पता लगाने के लिए 20 फीसद नमूना सर्वेक्षण के सत्यपान की अनुमति दी जाए. हमें नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है.

असम के लिए एनआरसी का पहला मसौदा उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 की दरम्यिानी रात को प्रकाशित हुआ था. उस समय 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम इनमें शामिल किए गए थे.

20वीं सदी की शुरुआत में बांग्लादेश से असम में बड़ी संख्या में लोग आए. असम इकलौता राज्य है जहां एनआरसी है जिसे सबसे पहले 1951 में तैयार किया गया था.

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