बिजली उत्पादन में देरी के लिए केन्द्र जिम्मेदार – ममता बनर्जी

कोलकाता. राज्य में अधिक से अधिक बिजली बचाने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोयला खनन और बिजली उत्पादन में समस्याओं को लेकर केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया है.

विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बुधवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला खनन क्षेत्र देवलापचामी में खनन का अधिकार चार सालों पहले ही राज्य सरकार को मिल गया था. नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो गई है लेकिन केन्द्र सरकार ने अभी तक खनन की अनुमति नहीं दी.

इससे राज्य में बिजली उत्पादन में भी समस्या हो रही है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आम लोगों से बिजली बचाने की अपील करते हुए अनावश्यक तौर पर पंखे, बत्ती और अन्य उपकरणों को नहीं चलाने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सुबह के 10 बज जाते हैं लेकिन सड़क पर लाइट जलती रहती है ऐसा नहीं होना चाहिए.

मेमारी से तृणमूल कांग्रेस की विधायक नरगिस बेगम ने सवाल पूछा कि राज्य में बिजली उत्पादन की अभी क्या स्थिति है? इसके जवाब में ऊर्जामंत्री शोभन देव चटर्जी ने कहा कि पिछले साल मार्च से इस साल मई तक राज्य में 14 हजार 152 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है.

वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में केवल 85 लाख बिजली उपभोक्ता थे. वहीं इस साल मार्च के आंकड़े के मुताबिक ये संख्या बढ़कर एक करोड़ 91 लाख पर पहुंच गई है. यानी सात साल 10 महीने में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या एक करोड़ पांच लाक 35 हजार बढ़ी है.

माकपा विधायक तन्मय भट्टाचार्य ने सवाल पूछा कि इतनी अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन हो रहा है और उपभोक्ता भी तेजी से बढ़ रहे हैं तो वित्त वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार ने 300 मेगावाट बिजली क्यों खरीदी? बाहर से बिजली क्यों खरीदनी पड़ रही है? इसके जवाब में ऊर्जामंत्री ने कहा कि अधिकतर बिजली उत्पादन इकाइयां कोयला पर आधारित हैं और कोयला खनन शुरू नहीं होने के कारण बिजली उत्पादन भी नहीं हो पा रहा है.

राज्य में मौजूद सभी बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए 12 रेक कोयले की जरूरत है. जबकि केवल दो से तीन रेक मिल रहा है इसलिए बिजली उत्पादन बाधित हो रही है. इसी बीच मुख्यमंत्री बनर्जी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि चार साल पहले ही दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कोयला खनन क्षेत्र देवलापचामी में खनन का अधिकार पश्चिम बंगाल सरकार को मिला था. नियुक्ति भी हो चुकी है.

केवल केन्द्र और राज्य सरकार के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होना है. लेकिन इसे टाला जा रहा है. अगर यहां कोयला खनन शुरू हो जाए तो बीरभूम, बर्दवान, बांकुड़ा और पुरुलिया जिले की स्थिति बदल जाएगी.

ममता ने दावा किया कि उन्होंने खुद चार से पांच बार केन्द्र से इस मामले में फोन पर संपर्क किया है. मुख्य सचिव मलय दे को दिल्ली भी भेजा लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कटवा विद्युत केन्द्र को लेकर भी केनेद्र के सकारात्मक रुख की उम्मीद की थी. बातचीत भी हुई थी लेकिन उस पर भी कोई काम नहीं हुआ. कभी-कभी बाहर से कोयला खरीदना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री ने मीडिया से इस मामले को प्रमुखता से उठाने की अपील की है.

हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश

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