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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं त्रिलोचन और शक्तिपद की हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस पहले ही आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.

तीसरे कार्यकर्ता दुलाल कुमार की मौत को राज्य सरकार ने आत्महत्या बताया है. कोर्ट ने उसकी मेडिकल रिपोर्ट मांगी है. इस मामले पर अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी. पिछले 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता गौरव भाटिया को तीनों केस के तथ्य रखने की इजाज़त दी थी.

04 अक्टूबर 2018 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गौरव भाटिया ने कहा था कि राज्य सरकार की रिपोर्ट गुमराह करने वाली है. उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार ने दुलाल की मौत को आत्महत्या बताकर जांच बंद कर दी है.

वहीं त्रिलोचन और शक्तिपद की हत्याओं के मामले में ज्यादातर आरोपित गिरफ्तार नहीं हुए. 17 सितंबर,2018 को राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि राज्य पुलिस सभी मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है.

कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं. पिछले 24 अगस्त को कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया था. भाजपा नेता गौरव भाटिया ने याचिका दायर कर पिछले कुछ महीनों में बंगाल में हुई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं का हवाला दिया था.

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार जांच को लेकर गंभीर नहीं. इसलिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए. गौरव भाटिया ने त्रिलोचन, दुलाल और शक्तिपद की हत्या का मामला कोर्ट में रखा और कहा कि पुलिस जांच में लापरवाही बरत रही है. याचिका में मरने वालों के परिवार को 50 लाख रुपया मुआवजा देने की भी मांग की गई है.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/आकाश