मुश्किल में फंसे हुड्डा और वोरा

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और कांग्रेस नेता मोती लाल वोरा की मुश्किल बढ़ गई है. सीबीआई ने एसोसिएटेंड जनरल लिमिटेड को पंचकूला में जमीन आवंटित करने के मामले में हुड्डा के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी है.

इस मामले में कांग्रेस के अन्य नेता मोतीलाल वोरा की परेशानियां भी बढ़ गई हैं. सीबीआई ने पंचकूला में एक जमीन दोबारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को देने के मामले में हुड्डा और वोरा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है.

यह मामला काफी पुराना है. केंद्र में मोदी सरकार आने के दो साल बाद इस केस को 2016 में सीबीआई को सौंपा गया था. सीबीआई ने अपनी एफआईआर में कहा था कि वर्ष 1982 में एजेएल को पंचकूला में एक भूखंड आवंटित किया गया था, लेकिन वर्ष 1992 तक उस पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया.

इसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने इस भूखंड को फिर से अपने कब्जे में ले लिया था. सीबीआई की एफआईआर में कहा गया कि एजेएल को 2005 में यही भूखंड फिर से आवंटित किया गया. हुडा के तत्कालीन अध्यक्ष ने इस आवंटन में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन किया.

उस समय हुडा के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा थे. एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का नियंत्रण कथित रूप से गांधी परिवार समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के पास है. एसोसिएटेड जर्नल्स, नेशनल हेराल्ड चलाता है.

CBI ने एक विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया. आरोप है कि सी-17 नाम के जमीन के टुकड़े को दोबारा आवंटित करने की वजह से राजकोष को 67 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.

आरोप के अनुसार नियम कानून का उल्लंघन कर पंचकूला में एसोसिएट जनरल लिमिटेड को जमीन अलॉट किया गया है. हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने सीएम रहते हुए एजेएल कंपनी को 2005 में 1982 की दरों पर प्लॉट अलॉट करवाया. मामले में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप में हरियाणा विजिलेंस विभाग ने 2016 में मामला दर्ज किया गया था.

मामले में सीबीआई ने एआईसीसी के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को भी पार्टी बनाया हुआ है. ऐसे में अब दोनों को इस मामले में भी मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.

कांग्रेस ने इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करार दिया है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि जैसे ही चुनाव नजदीक आता है, सरकार इस तरह की गितविधियों में लग जाती है. सिंघवी ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य मतदान के दौरान सुविधा के अनुसार इस तरह के औजारों का उपयोग करना है.

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