बिहार में दोधारी तलवार है जाति

मोहन सहाय

बिहार में चुनाव परिणाम तय करने में इस बार व्यक्ति विशेष पर आधारित राजनीति (पॉलिटिक्स ऑफ आइडेंटिटी) के साथ जाति एक महत्वपूर्ण कारक है. जाति बिहार में दोधारी तलवार जैसा काम कर रही है. 

जाति की मार से राज्य में हर पार्टी चोटिल हो रही है. राज्य में एक और बिंदु उभर कर आया है. वह है, मोदी के लिए वोट. शायद ही कोई मतदाता कहता है कि वो बीजेपी को या चुनावी मैदान में मौजूद किसी उम्मीदवार को वोट देगा. 

वैशाली लोकसभा क्षेत्र, जहां मुजफ्फरपुर जिले के मतदाताओं की भी बड़ी हिस्सेदारी है, से समाजवादी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह राजद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. 

2014 में उन्हें यहां हार का सामना करना पड़ा था. उनका मुकाबला रामबिलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की उम्मीदवार और अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरा बीना देवी से है. 

बीना देवी बिहार के एक अमीर राजनेता विनय सिंह की पत्नी हैं, जो बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. बीना देवी के भी राजपूत होने से राजपूत वोट का बंटना तय है. 

फिर भी यहां एनडीए का समर्थन करने वाले मतदाताओं का कहना है कि ‘हमारा वोट मोदी के लिए है.’ परंपरागत रूप से राजपूतों के विरोधी माने जाने वाले भूमिहार भी इस बार मोदी के नाम पर बीना देवी को वोट देंगे.

बिहार के चुनाव में तीसरी महत्वपूर्ण बात लालू यादव का चुनाव प्रचार से दूर होना है. वे अभी जेल में है. उनके बेटे तेजस्वी चुनावी परिदृश्य से लालू यादव की अनुपस्थिति की भरपाई नहीं कर पा रहे हैं. 

इसका फायदा बीजेपी को होगा. बिहार की 40 लोकसभा सीटों में दो निर्वाचन क्षेत्र इस बार पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. 

बेगूसराय जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ने के कारण चर्चा में है. पटना साहिब की सीट पर लड़ रहे फिल्म अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा से किनारा कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. 

यहां उनका मुकाबला मोदी सरकार में मंत्री रविशंकर प्रसाद से है, जो पटना साहेब के कायस्थ वोटों को पूरी तरह से अपने पाले में खींचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

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