यात्रियों को रियायत से घट रहा है रेलवे का मुनाफा: कैग

रेलवे का परिचालन मुनाफा लगातार घटता चला जा रहा है, जिसके चलते विस्तार कार्यों के लिए धन आवंटन में कमी करनी पड़ रही है. रेलवे विस्तार के लिए सरकार को बजट और बजट के बाहर से धन जुटाने के प्रावधान करने पड़ रहे हैं. 

वहीं रेलवे का ज्यादातर मुनाफा रियायत देने में खपत हो रहा है. यह बातें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सोमवार को संसद में पेश रिपोर्ट में सामने आई है.

कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार रेलवे ने 100 रुपये कमाने के लिए 98.44 रुपये खर्च किए हैं. यह पिछले 10 वर्षो में सबसे खराब रहा है. परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में इस वर्ष 98.44 प्रतिशत रहा है. 

वित्त वर्ष 2008-09 में 90.48 प्रतिशत, 2009-10 में 95.28 प्रतिशत, 2010-11 में 94.59 प्रतिशत, 2011-12 में 94.85 प्रतिशत, 2012-13 में 90.19 प्रतिशत, 2013-14 में 93.6 प्रतिशत, 2014-15 में 91.25 प्रतिशत, 2015-16 में 90.49 प्रतिशत, 2016-17 में 96.5 प्रतिशत और 2017-18 में 98.44 प्रतिशत है.

यात्रियों को दी जाने वाली रियायतों के प्रभाव की समीक्षा से पता चला कि रियायतों के प्रति राजस्व का 89.7 प्रतिशत हिस्सा वरिष्ठ नागरिकों और विशेषाधिकार पास पीटीओ धारकों को रियायत के कारण था. वरिष्ठ नागरिक यात्रियों से गिव-अप योजना की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं थी. 

रेलवे ने वरिष्‍ठ नागरिकों को रेल किराये पर मिलने वाली रियायत छोड़ने के लिए ‘गिव अप’ योजना शुरू की थी. इसमें वरिष्ठ नागरिक आगामी किराये में दी जा रही छूट को न लेने के दो विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें 50 प्रतिशत और दूसरा है 100  प्रतिशत यानि कि पूरी छूट का लाभ नहीं लेना शामिल है. इसके अलावा रियायतों के चलते गैर-एसी के मुकाबले एसी श्रेणी में यात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है.

मेडिकल सर्टिफिकेट पर पास के दुरुपयोग और रियायतों के अनियमित अनुदान के कई उदाहरण देखे गए. यात्री आरक्षण प्रणाली में स्वतंत्रता सेनानियों की आयु को मान्य करने और समान विशेषाधिकार पास पर अनियमित कई बुकिंग को रोकने के लिए पर्याप्त सत्यापन नियंत्रण का अभाव है. कैग ने रेलवे को अतिरिक्त बजटीय संसाधनों पर निर्भरता कम कर आंतरिक राजस्व बढ़ाने के लिए उपाय तलाशने की सिफारिश की है.

हिन्दुस्थान समाचार/सुशील

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