पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का शव पैतृक गांव लाया गया

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  • सुबह नई दिल्ली में निधन होने के बाद से मारवाड़ में शोक

मारवाड़ के कद्दावर नेता पूर्व रक्षा, वित्त एवं विदेश मंत्री मंत्री जसवंत सिंह जसोल का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया. निधन की जानकारी मिलने के बाद मारवाड़ में शोक की लहर छा गई. वह पिछले लंबे समय से बीमार होने के साथ कोमा में थे और उनका गहन उपचार चल रहा था. वे भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार थे. जसोल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के समय रक्षामंत्री रहे थे.

82 साल के जसोल जसवंत सिंह वर्ष 1980 से लेकर 2014 तक संसद के दोनों में किसी एक सदन के लगातार सांसद रहे. अपनी पुस्तकों के कारण वे विवादों में भी घिरे रहे. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व जसवंत सिंह ने पार्टी के समक्ष अपनी इच्छा जताई थी कि यह उनका अंतिम चुनाव होगा और उन्हें अपने पैतृक संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया जाए लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया. बाद में वे पार्टी से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन हार गए.

राजनीतिक जीवन

केंद्रीय मंत्री जसोल वर्ष 1980, 1986, 1998, 1999 व 2004 में पांच बार राज्यसभा के सदस्य रहे. 1990, 1991, 1996 व 2009 में लोकसभा के सदस्य रहे. खासियत की बात यह रही कि वे संसदीय क्षेत्र बदलने के बावजूद आसानी से चुनाव जीतते रहे हैं. उन्होंने वर्ष 2012 में उपराष्ट्र्रपति का चुनाव लड़ा लेकिन यूपीए के प्रत्याशी हामिद अंसारी के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

वाजपेयी शासन में रक्षा व वित्त मंत्री

जसोल पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के समय केन्द्र में रक्षा, वित्त और विदेश मंत्री रहे. वर्ष 1998 में देश के परमाणु परीक्षण के बाद वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़े भारत की स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी वाजपेयी ने जसवंत को सौंपी और उन्होंने देश को निराश नहीं किया. वर्ष 2004 से 2009 तक वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे.

सेना में भी रहे

केंद्रीय मंत्री जसोल 1957 से 1966 तक सेना में रहे और साल 1965 के युद्ध में हिस्सा लिया. सेना से रिटायर्ड होने के थोड़े समय बाद वे जोधपुर के महाराजा गजसिंह के सलाहकार बन गए. उन्होंने ने 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कहने पर राजनीति मे प्रवेश किया था.

जोधपुर से 1989 में लड़ा चुनाव, गहलोत से हारे थे

वर्ष 1989 में जसवंत ने अपना पहला लोकसभा चुनाव जोधपुर से लड़ा. इस चुनाव में वे राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चुनाव हार गए थे. उसके बाद उन्हें गहलोत के सामने चुनाव लडऩे का मौका नहीं मिल पाया. फिर बाड़मेर जैसलमेर संसदीय चुनाव से बढ़ते गए.

हिन्दुस्थान समाचार/सतीश