• 1967 में अटल बिहारी बाजपेयी ने यहां से अपने सहयोगी शारदानंद दीक्षित को टिकट दिया. शारदानंद ने भी जीत दर्ज की
  • 1998 के उपचुनाव में फिर से जनार्दन को जिताकर जनता ने संसद भेजा पर 1999 में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजेश वर्मा को जिताया

यूपी की लोकसभा सीट सीतापुर का गठन 1952 में हुआ था. 52 के चुनाव में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की चचेरे भाई की पत्नी उमा नेहरू ने यहां से चुनाव लड़ा था और बड़ी जीत दर्ज की थी, वो 1957 में भी जीतीं लेकिन 1962 में जनसंघ के सूरज लाल वर्मा ने उमा नेहरू को हरा दिया.

1967 में अटल बिहारी बाजपेयी ने यहां से अपने सहयोगी शारदानंद दीक्षित को टिकट दिया. शारदानंद ने भी जीत दर्ज की. पर 1971 में पासा पलट गया और कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित ने शारदानंद को हरा दिया. 1977 में भारतीय लोकदल के हरगोविंद वर्मा ने सीतापुर लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की.

1980 से 89 तक राजेन्द्र कुमारी बाजपेयी ने लगातार तीन बार जीत दर्ज करके सीतापुर की राजनीति में हलचल लाने का काम किया. पर 1991 में भाजपा के प्रत्याशी जनार्दन प्रसाद मिश्र ने राजेन्द्र कुमारी बाजपेयी को हरा दिया. 1996 में जनार्दना का साथ छोड़कर जनता जनार्दन ने गांजर के गांधी मुख्तार अनीस को जिताने का काम किया. मुख्तार अनीस सपा के प्रत्याशी थे.

1998 के उपचुनाव में फिर से जनार्दन को जिताकर जनता ने संसद भेजा पर 1999 में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राजेश वर्मा को जिताया. राजेश वर्मा 2004 में भी जीत गए पर 2009 में राजेश वर्मा का टिकट काट कर बसपा ने कैसरजहां को टिकट दे दिया.

कैसर जहां तो महेन्द्र सिंह वर्मा जो सपा प्रत्याशी महेन्द्र सिंह वर्मा को हरा दिया लेकिन धौरहरा से राजेश वर्मा कांग्रेस के कद्दावर नेता जितिन प्रसाद से चुनाव हार गए. वर्ष 2014 में राजेश वर्मा ने बीजेपी का दामन थाम लिया और फिर सांसद बने.

  • सीतापुर लोकसभा क्षेत्र-
  • कुल मतदाता -1663745
  • महिला – 775797
  • पुरुष – 889879
  • मतदान केंद्र -1217
  • बूथ – 1985
  • संवेदनशील बूथ – 146
  • अतिसंवेदनशील बूथ – 45
  • 2014 में मतदान प्रतिशत 66.25
  • कुल प्रत्याशी – 12

सीतापुर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है. यहां कांग्रेस से कैसरजहां, बसपा उम्मीदवार नकुल दुबे और भाजपा के राजेश वर्मा चुनाव लड़ रहे हैं. सीतापुर में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें सीतापुर, लहरपुर, बिसवां, सेवता और महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं.

बसपा इस सीट पर तीसरी बार कब्जा करने की जुगत में है. कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है. वहीं भाजपा यहां फिर से काबिज होने की जुगत में मेहनत कर रही है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सीट से कौन सा राजनीतिक दल बाजी मारेगा.

मधुकर

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