बीजेपी का ‘संगठन पर्व’

संजीव कुमार

‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं.’ यह कहावत बीजेपी पर लागू होती है. संसद में बीजेपी का सफर दो सांसद से शुरू हुआ था. आज भाजपा के 303 सांसद हैं. 

यह सफर यूं ही नहीं पूरा हुआ है. इसकी नींव में लाखों कार्यकर्ताओं की त्याग और तपस्या है. कोई भी पार्टी तभी सत्ता में आती है जब उसके कार्यकर्ता सक्रिय और संगठन मजबूत हो. 

आज बीजेपी अगर लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है तो उसके पीछे उसका संगठन और उसके कार्यकर्ता हैं. वहीं कांग्रेस की इस दयनीय स्थिति के लिए जिम्मेदार उसका संगठन है. 

आज जो काम कांग्रेस को करना चाहिए था, वह काम बीजेपी कर रही है. लोकसभा में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस को आत्मचिंतन करना चाहिए था, अपनी पार्टी से नये कार्यकर्ताओं को जोड़कर संगठन को मजबूत करना चाहिए था. 

आज कांग्रेस पर इस्तीफा, परिवारवाद और अंदरूनी विवाद हावी है. कितनी बड़ी विडंबना है कि एक तरफ लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी जहां अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति को तलाशने में माथापच्ची कर रही है.

वहीं बीजेपी ने प्रचंड जीत मिलने के बाद भी देशव्यापी सदस्यता अभियान आरंभ किया है. कहना गलत न होगा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की इतनी बड़ी जीत में कार्यकर्ताओं की भारी-भरकम फौज का बड़ा हाथ है. 

शायद यही वजह है कि बीजेपी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का दावा करते हैं. बताते चलें कि 2014 में सरकार बनते ही पार्टी 2019 की तैयारी में जुट गई थी. 

एक मई 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजेपी के सदस्यता अभियान का आरंभ किया था. उसी तर्ज पर 2019 में भी सरकार बनने के बाद भाजपा ने 2024 को लक्ष्य कर राष्ट्रीय सदस्यता अभियान का आरंभ किया है.

6 जुलाई को काशी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजेपी के देशव्यापी सदस्यता अभियान ‘संगठन पर्व’ की शुरुआत की. उन्होंने सदस्यता अभियान की शुरुआत करने के बाद 5 हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बजट की बारीकियों के साथ अगले 5 साल की योजना बताई.

पूरा लेख पढ़ें 21 जुलाई के अंक में…

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