महाराष्ट्र में मंदिर पर राजनीति गरमाई, राज्यपाल को शिवसेना ने दिया जवाब

Temple Reopen in Maharashtra
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मुंबई, महाराष्ट्र।

महाराष्ट्र में मंदिर खोलने पर राजनीति गरमा गई है. मंदिर खोलने के लिए राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र और उसके बाद मुख्यमंत्री के जवाबी पत्र को लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में सरगर्मी बढ़ गई है.

शिवसेना ने इस मामले पर राष्ट्रपति को ध्यान देने और राज्यपाल को संविधान की नसीहत देने की भी मांग की है. बता दें कि राज्यपाल ने राज्य सरकार को मंदिर खोले जाने के लिए पत्र लिखा था. इस पत्र में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को हिंदुत्व छोड़कर सेकुलर होने का भी तंज कसा था.

इस पत्र का जवाब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी उसी टोन में दिया. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि उन्हें कोई हिंदुत्व न सिखाए. हिंदुत्व शिवसेना की आत्मा है और सत्ता के लिए शिवसेना ने कभी भी हिंदुत्व से समझौता नहीं किया.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि श्रद्धा जरूरी है लेकिन लोगों के स्वास्थ्य की चिंता श्रद्धा से बढ़कर है. राज्य में मंदिर खोले जाने का भी विचार किया जा रहा है. शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने राज्यपाल के पत्र को संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला बताया है. राऊत ने कहा कि राज्यपाल को सूबे में अनलॉक के बारे में नहीं बोलना चाहिए.

राज्यपाल का पत्र ही संविधान का आह्वान करने वाला है. राष्ट्रपति को राज्यपाल से खुद इस पत्र के बारे में पूछताछ करनी चाहिए. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि राज्यपाल के पत्र का मुख्यमंत्री गलत अर्थ निकाल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को जिस भाषा में जवाब दिया है, वह गलत है.

उन्होंने कहा कि देश संविधान से चल रहा है और सेकुलर में ही हिंदुत्व समाया हुआ है. मुख्यमंत्री को हिंदू समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर खोलने की अनुमति नियमावली बना कर देनी चाहिए. सभी लोग नियमावली का पालन करेंगे.

विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव सरकार ने जिस अंदाज में राज्यपाल के पत्र का उत्तर दिया है, वह तानाशाही रवैये को दर्शाता है. राज्यपाल संवैधानिक पद पर विराजमान है, उन्हें इस तरह से उत्तर नहीं दिया जाना चाहिए. दरेकर ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की फिक्र है, उन्हें अब राज्य की जनता से कोई प्रतिबद्धता नहीं रह गई है.

खाद्यान्न मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल का पत्र नहीं देखा है लेकिन हमारा संविधान धर्मनिरपेक्षता पर ही आधारित है. इसलिए सभी को इसी दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए. छगन भुजबल ने कहा कि राज्य सरकार इस दायरे में रहकर काम कर रही है.

भुजबल ने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण कम हो रहा है, सरकार अनलाक की दिशा में आगे बढ़ते हुए मंदिर खोलने पर भी निर्णय लेने वाली है. वहीं वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने मंदिर खोले जाने का निर्देश जारी कर दिया है. इसके बाद राज्य सरकार मंदिर खोलने के लिए आनाकानी क्यों कर रही है, यह समझ से परे हैं.

प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना का बहाना कर रही है लेकिन राज्य में होटल, बार सभी कुछ शुरू हो गया है. प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि इस संबंध में राज्यपाल व मुख्यमंत्री दोनों के पत्र गलत ही हैं, दोनों को इस तरह पत्राचार से बचना चाहिए.

हिन्दुस्थान समाचार/राजबहादुर