बीजेपी सांसद आरके सिन्हा ने आयोजित किया जैविक खेती पर ट्रेनिंग प्रोग्राम, आद्या ऑर्गैनिक्स के फार्म में कल से कृषि वैज्ञानिक किसानों को देंगे जैविक खेती की जानकारी

भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन अफसोस ये है कि कृषि प्रधान देश में किसान की हालत दयनीय हो गई है. सरकारों ने किसानों के नाम पर वोट तो मांगा लेकिन उनके लिए काम नहीं किया. यही कारण है कि देश का किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या तक करने को मजबूर हो गया.

किसानों की हालात में सुधार करने के लिए ‘जैविक मैन’ के नाम से मशहूर बीजेपी के राज्यसभा सांसद और हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के अध्यक्ष आरके सिन्हा सामाजिक कार्यों के साथ-साथ जैविक खेती को लेकर भी बेहद सजग हैं. वे राज्यसभा में लगातार जैविक खेती के मुद्दे को उठाते रहते हैं. उनकी बातों से प्रभावित होकर ही सरकार भी अब जैविक खेती पर जोर दे रही है.

वहीं सांसद सिन्हा ने किसानों को जैविक खेती के महत्व को समझाने के लिए नोएडा में स्थित आद्या ऑर्गैनिक्स के फार्म में 3 दिन के ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन गया है. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का संचालन मध्य प्रदेश के सागर जिले के कृषि वैज्ञानिक आकाश चौरसिया जी और महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रहने वाले दीपक नरवरे जी करेंगे. कार्यक्रम में कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री परसोत्तमभाई रुपाला भी शिरकत करेंगे.

ये ट्रेनिंग प्रोग्राम कंपनी के नोएडा सेक्टर 167 स्थित अन्नपूर्णा फार्म हाउस पर किया जाएगा. ये ट्रेनिंग प्रोग्राम जैविक कृषि वैज्ञानिक आकाश चौरासिया के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है. ये मल्टीलेयर फार्मिंग का प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम होगा. ये प्रोग्राम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगा.

इस प्रोग्राम का उदेश्य देसी बीजों, गोबर की खाद, गौमूत्र और जड़ी-बूटियों से बने कीटनाशकों की सहायता से कम लागत में ज्यादा आमदनी कैसे हो और विषमुक्त आहार का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, सिखाना होगा.

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लेने के लिए किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए 8130032014, 9354924309, 9354924305 और 9999030690 पर फोन करना होगा.

बता दें कि रासायनिक खाद का खेती में अधिकाधिक प्रयोग करके किसानों द्वारा उत्पादन बढ़ा रहे हैं लेकिन इसके दुष्परिणाम तेजी से सामने आ रहे हैं. रासायनिक खाद से लोग कैंसर, किडनी खराब होने जैसी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं. इसलिए किसानों को परंपरागत खेती पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. जैविक खाद के प्रयोग से उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता है.

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