देश की पहली महिला प्रिंसिपल सावित्री बाई फुले का दिन आज

Savitri Bai Phule | India News In Hindi
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on whatsapp
WhatsApp

आज के समय में भारत में महिलाएं जिस स्तर पर पहुंची हैं उसका श्रेय देश की पहली महिला शिक्षक को देना कोई बड़ी बात नहीं है. देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले के कारण ही लड़कियां पढ़ाने और समाज को ऊपर उठाने में लगा दिया है. बता दें कि सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के एक दलित परिवार में हुआ था.

आज सावित्री बाई फुले की 189वीं जयंती है. इस मौके पर पीएम मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है. पीएम मोदी ने फुले को महिला सशक्तिकरण, शिक्षा के लिए किए गए कार्यों के लिए नमन किया.

उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

– उनका जन्म दलित परिवार में हुआ था. मगर इसके बावजूद उनका लक्ष्य था कि किसी के भी साथ में भेदभाव न हो. सभी को समान अवसर मिले.

– 10 साल की उम्र फुले की शादी क्रांतिकारी ज्योतिबा फुले से हो गई. उस समय ज्योतिबाफुले की उम्र सिर्फ 13 साल की थी.

– शादी होने के बाद उन्हें और उनके पति को पढ़ाई करने से रोक दिया गया. दलित समाज में जन्म लेने के कारण उन्हें पढ़ने नहीं दिया जाता था.

– इसके बाद भी पति ने ही सावित्री की घर में पढ़ने की मदद की. प्राइमरी स्तर की पढ़ाई घर में करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई की. उन्होंने शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए दो प्रोग्रामों में हिस्सा लिया.

– अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद फुले ने पुणे के एक स्कूल में छात्राओं को पढ़ाना शुरू किया. हालांकि उन्हें इसके लिए काफी विरोध झेलना पड़ा. कहा जाता है कि जब फुले स्कूल पढ़ाने जाती थी तो उनके ऊपर गाय का गोबर और कीचड़ फेंका जाता था.

– लोगों के विरोध झेलते हुए भी सावित्री बाई फुले ने उस समय में कुल 18 स्कूल खोले थे. उन्होंने उस समय महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया जब इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था.

– उन्होंने अपना जीवन भी समाजसेवा में ही लगा दिया था. 10 मार्च 1897 के दिन प्लेग के मरीजों की देखभाल करते हुए ही फुले को भी प्लेग हुआ. इसी बीमारी से उनका भी निधन हो गया था.