बिहार में बाढ़ का विकराल रूप, 25 की मौत, 25 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

नई दिल्ली/पटना, 16 जुलाई. नेपाल में भारी बारिश और वहां से छोड़े जा रहे पानी ने बिहार में बाढ़ के हालात पैदा कर दिए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में बाढ़ की स्थिति से निपटने के बारे में विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 26 टीमों ने एक लाख 25 हजार से ज्यादा लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से बाहर निकाला है.

साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 199 राहत कैंप भी बनाए गए हैं और 676 सामुदायिक रसोई घर भी स्थापित किए गए हैं. इसके अलावा बाढ़ से निपटने के लिए और भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

दरअसल बिहार के दर्जनभर से ज्यादा जिलों में बाढ़ से तबाही मची है. जानकारी के मुताबिक बाढ़ से अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है. जबकि 25 लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ की चपेट में है.

बाढ़ से सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, शिवहर और दरभंगा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया.

बिहार के जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है, उनमें किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, शिवहर, पूर्वी चंपारण, सहरसा, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिले शामिल हैं. आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 77 प्रखंडों की 546 पंचायतों के 25 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

बाढ़ से अब तक 25 लोगों की मौत हो गई है. मुख्यमंत्री ने लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया.

समस्तीपुर रेल मंडल के दरभंगा-सीतामढ़ी रेल खंड पर मंगलवार मध्य रात्रि 1.50 बजे सूचना मिली कि कमतौल-जोगियारा के बीच बाढ़ का पानी रेल पुल संख्या-18 के खतरे के निशान को पार कर गया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल रेल यातायात रोक दिया गया है और जलस्तर की निगरानी की जा रही है.

मुख्यमंत्री ने सोमवार को अररिया जिले के सिकटी, पलासी, जोकीहाट, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, फारबिसगंज, कोचाधामन, टेढ़ागाछ और कटिहार जिले के बलरामपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति की जानकारी ली.

इसके बाद पूर्णिया के चूनापुर हवाई अड्डे पर पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जिले के जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ और राहत एवं बचाव कार्य के बारे में समीक्षा की.

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं. सीएम नीतीश ने ग्रामीण कार्य विभाग और पथ निर्माण विभाग के अधिकरियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लेने और संपर्क से कटे हुए स्थानों का संपर्क तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है.

हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्य सचिव दीपक कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार भी मौजूद थे.

इस बीच नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है. बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि सोनाखान, डूबाधार, कनसार, बागमती ढेंग और बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, वहीं कमला बलान नदी जयनगर और झंझारपुर में और महानंदा ढेंगराघाट और झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

मुजफ्फरपुर जिले में बागमती के उफान से कटरा और औराई में बाढ़ ने भयंकर रूप ले लिया है और दो हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. पूर्वी चंपारण के नए इलाकों में पानी तेजी से घुस रहा है. सुपौल में भी नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुस चुका है.

बाढ़ से सीतामढ़ी के गांवों की स्थिति और बदतर हो गई है. सीतामढ़ी के कई गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अभी तक राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है.

शिवहर में भी बाढ़ से लोगों का बुरा हाल है. कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है. अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी लगातार नए क्षेत्रों में फैल रहा है.

Leave a Comment

%d bloggers like this: