बिहारः गुटबाजी के कारण आसान नहीं है बेगूसराय में कमल खिलना

Begusarai Seat
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बेगूसराय, बिहार।

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. चुनाव आयोग ने 29 नवम्बर से पहले चुनाव की सभी प्रक्रिया समाप्त कर लेने का दावा किया है. बेगूसराय के सभी 7 सीटों पर मुकाबला एनडीए एवं महागठबंधन के बीच में होना है.

दोनों गठबंधन में शामिल दलों के आलाकमान सीट शेयरिंग का फार्मूला और प्रत्याशियों के चयन प्रक्रिया में जुटे हुए हैं. लेकिन सबसे खराब मारामारी की हालत भारतीय जनता पार्टी में मची हुई है. बीजेपी के अंदर बेगूसराय में कई गुट बने हुए हैं और ये गुट क्या गुल खिलाएंगे, यह कहना मुश्किल है.

पिछले कई सालों से जारी गुटबाजी समाप्त होने के बदले बढ़ती गई और आज 5-6 गुट बन गए. अब विधानसभा चुनाव हो रहा है तो सभी गुट के अपने-अपने प्रत्याशी हैं और यही हाल रहा तो शायद पिछले विधानसभा चुनाव की तरह बीजेपी एक भी सीट जीत सकेगी.

यहां के 7 में 3 से 4 सीट बीजेपी के कोटे में जानी है, लेकिन दावेदारों की बहुत बड़ी फौज खड़ी हो चुकी है. बीजेपी के अंदर सबसे अधिक प्रत्याशियों की भरमार बेगूसराय विधानसभा में है.

सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर, प्रो. संजय गौतम, महापौर के बेटे कुंदन कुमार सिंह, पूर्व विधायक सुरेन्द्र मेहता, 3 पूर्व जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिंह, संजय सिंह एवं जयराम दास, जिला महामंत्री आशुतोष पोद्दार हीरा, सहकारिता प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश मंत्री नवीन कुमार समेत दर्जन भर से अधिक प्रमुख कार्यकर्ता यहां दावेदारी दे रहे हैं.

बीजेपी जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह भले ही किसी गुटबाजी की बात स्वीकार नहीं करें लेकिन नेता ही नहीं जनता भी समझ रही है कि बेगूसराय बीजेपी में दल के अंदर दलदल की हालत बन चुकी है. पार्टी आलाकमान के लिए अभी भी समय है कि वह सतर्क हो जाए और गंभीरता पूर्वक एकजुट करे, वरना टिकट की घोषणा होते ही हालत बहुत खराब हो सकती है.

यही हाल बखरी विधानसभा क्षेत्र का भी है. यहां पूर्व विधायक रामानंद राम, राम शंकर पासवान, मीनू कुमारी, सुमन कुमारी राम और कपिल देव राम टिकट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. यह पांचों प्रत्याशी जिला के अलग-अलग गुटों से संबंधित हैं. बात करें बछवाड़ा की तो वहां से भी सभी गुट के अपने-अपने प्रत्याशी हैं.

तेघड़ा विधानसभा में भी कम से कम चार गुटों के प्रत्याशी अपना दावा ठोक रहे हैं. सभी के सभी क्षेत्र में घूम रहे हैं. फिलहाल हालत यह है कि बीजेपी के प्रति समर्पित भाव से जुड़े वोटर संशय की स्थिति में है कि पता नहीं क्या होगा. क्या ऐसे में बीजेपी यहां एक भी सीट ले पाएगी. 2015 में बेगूसराय जिला के चार सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिला था.

अब जबकि 5 साल के दौरान हालत बदल गए हैं. लोगों तक नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे विकास की रोशनी पहुंच चुकी है. लेकिन पार्टी के अंदर खाने में मची हलचल से यह तय है कि टिकट की घोषणा होने के बाद बाकी दावेदार पार्टी उम्मीदवार से खुन्नस निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र