“वन नेशन, वन राशन कार्ड” योजना से खुद को अलग कर सकती है बंगाल सरकार

कोलकाता. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना से खुद को अलग करने के बाद अब राज्य की ममता बनर्जी सरकार “वन नेशन, वन राशन कार्ड” जैसी राष्ट्रव्यापी योजना से भी खुद को अलग करने जा रही है.राज्य के खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने गुरुवार को यह जानकारी दी.

मल्लिक ने कहा, “हमें वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना के संबंध में केंद्र सरकार से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है.इसमें शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है.केंद्र के साथ “मतभेदों” का हवाला देते हुए मल्लिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार डिजिटल राशन कार्ड जारी करने के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है.उन्होंने कहा, “हमारी राशि हमें कौन वापस देगा? हम इसे लागू नहीं करेंगे.इसके अलावा, बड़ी मात्रा में फंड है, जो हमें केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाला है. यह 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.”

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने 30 जून 2020 तक का समय सभी राज्यों को वन नेशन वन राशन कार्ड योजना से जोड़ने के लिए निर्देश दिया है.

दरअसल इस योजना के तहत लाभार्थी देश के किसी भी हिस्से में राशन की दुकानों से सब्सिडी वाले खाद्यान्न खरीद सकते हैं.यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति पीडीएस अधिकार से वंचित न रहे, भले ही वह व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो.

हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश

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