गंगासागर : तीर्थ यात्रियों की कलाई पर बांधे गये क्यूआर कोड वाले बैंड

  • दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट पी. उलगनाथन ने मंगलवार कहा कि देश भर से 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री यहां इकट्ठा होते हैं
  • अधिकारी ने कहा कि क्यू आर कोड वाले लगभग दो लाख कलाई बैंड, जिन्हें ‘परिचय’ नाम दिया गया है, जो बुजुर्ग तीर्थयात्रियों और बच्चों को मुफ्त में वितरित किए गए हैं

कोलकाता.‌ गंगासागर में पुण्य स्नान के उद्देश्य से देश दुनिया से आए लाखों पुण्यार्थियों की निगरानी के लिए दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये है. सीसीटीवी कैमरे के जरिए निगरानी के अलावा इस बार तीर्थ यात्रियों की कलाई पर क्यूआर कोड वाले बैंड बांधे गए हैं.

दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट पी. उलगनाथन ने मंगलवार कहा कि देश भर से 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री यहां इकट्ठा होते हैं. उन्होंने कहा कि इस साल हम उम्मीद कर रहे हैं कि 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री गंगासागर मेले का दौरा करेंगे, क्योंकि इस साल कोई कुंभ मेला नहीं है. डीएम ने कहा कि अपने परिजनों के साथ लापता तीर्थयात्रियों को ढूंढना भी प्रशासन के लिए एक चुनौती है क्योंकि कई बुजुर्ग व्यक्ति या बच्चे जो अपने परिवार से अलग हो जाते हैं, अक्सर अपना पता बताने में असफल रहते हैं. आमतौर पर, पांच से छह लाख वरिष्ठ नागरिक और बच्चे हर साल आते हैं. हर साल लगभग 10,000 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए जाते हैं और उनमें से 2,000 गंभीर होते हैं. इन मामलों के लिए, पुलिस और जिला प्रशासन को उनके परिवारों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है.

अधिकारी ने कहा कि क्यू आर कोड वाले लगभग दो लाख कलाई बैंड, जिन्हें ‘परिचय’ नाम दिया गया है, जो बुजुर्ग तीर्थयात्रियों और बच्चों को मुफ्त में वितरित किए गए हैं, ताकि वे भीड़ में खो जाएं तो कोड की मदद से उनके परिजनों के बारे में पता लगाया जा सके. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के परिवार के सदस्यों के नाम, पते और मोबाइल नंबर बार-कोडेड वॉटरप्रूफ बैंड में संग्रहीत किए जाते हैं और स्वयंसेवक आसानी से खोए हुए लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें अपने परिजनों के साथ एकजुट करना आसान हो जाएगा.

दरअसल राज्य सरकार ने गंगासागर तीर्थ यात्रियों के लिए पांच लाख के दुर्घटना बीमा की घोषणा की है. यह बारकोड इसे पात्रों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा. हर साल मकर संक्रांति के दिन लाखों श्रद्धालु पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में इकट्ठा होते हैं और गंगा नदी और सागर के संगम पर डुबकी लगाने के बाद कपिल मुनि आश्रम में पूजा-अर्चना करते हैं.

हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश

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