बतौर चेयरमैन अजमी प्रेमजी ने दी आखिरी स्पीच,कहीं ये बड़ी बात
  • 30 जुलाई को विप्रो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद छोड़ देगें
  • अजीम प्रेमजी के पिता दूरदर्शी प्रेमजी ने 1970 में साबुन-तेल छोड़कर सॉफ्टवेयर का रुख किया

नई दिल्ली. देश की आईटी इंडस्ट्री के दिग्गजों में से एक और देश के सबसे बड़े दानवीर अजीम प्रेमजी ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा काफी समय पहले कर चुके है.इसी के साथ उन्होंने बतौर चेयरमैन कंपनी की आखिरी एनुअल मीटिंग का हिस्सा बनते हुए ग्राहकों की जरूरतों पर ध्यान देने की सलाह दी.बतौर चेयरमैन अजमी प्रेमजी की यह आखिरी एनुअल मीटिंग थी.
अजमी प्रेमजी 30 जुलाई को चेयरमैन पद से रिटायर हो जाएंगें.इसके बाद कंपनी की कमान उनके बेटे रिशद प्रेमजी संभालेगें.

अजमी प्रेमजी ने कहीं ये बात

अजमी प्रेमजी ने इस मीटिंग में कहा तेजी से बदलाव के दौर में आगे रहने के लिए हमारा फोकस ग्राहकों की जरूरतों से जुड़े चार स्तंभों-बिजनेस री इमेजिशन,इंजीनियरिंग ट्रांसफॉर्मेशन एंड मॉडर्नाइजेशन,कनेक्टेड इंटेलिजेंस और विश्वास की रणनीति को मजबूत करने पर होगा चाहिए.
प्रेमजी आगे कहते हैं कि कंपनी मूल्यों पर टिके रहकर नई ऊंचाइयां छुएगी.प्रेमजी ने भरोसा जताते हुए कहा विप्रो आने वाले समय और ज्यादा बेहतर करेगी.

30 जुलाई को छोड़ेगें पद-

आपको बता दें कि अजीम प्रेमजी 30 जुलाई को विप्रो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद छोड़ देगें.एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने 53 सालों तक कंपनी को संभाला है और नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया है. अजीम प्रेमजी के लिए 53 सालों का ये सफर आसान नहीं था.लेकिन कई परेशानियों के सामने आने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और उनका सामना किया.

आपको बता दें कि अजीम प्रेमजी 30 जुलाई को विप्रो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद छोड़ देगें.एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने 53 सालों तक कंपनी को संभाला है और नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया है. अजीम प्रेमजी के लिए 53 सालों का ये सफर आसान नहीं था.लेकिन कई परेशानियों के सामने आने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और उनका सामना किया.

12 हजार गुना की कंपनी की वैल्यू-

अजीम प्रेमजी ने महज 21 साल की उम्र में ही कंपनी की जिम्मेजारी को संभाल लिया था.उन्होंने 53 सालों तक कंपनी को संभाला और कंपनी के कारोबार को 12 हजार गुना तक बढ़ाया. अजीम प्रेमजी ने जब कंपनी की जिम्मेदारी को संभाला था उस समय कंपनी की मार्केट वल्यू महज 7 करोड़ रुपए थी. जिसे उन्होंने 12 हजार गुना बढ़ाकर 83 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया.

अजीम प्रेमजी की कंपनी विप्रो एक समय में वेजीटेबल ऑयल और साबुन का बिजनेस करने वाली कंपनी हुआ करती थी.लेकिन अजीम प्रेमजी ने विप्रो को आज दुनिया की टॉप दिग्गज कंपनियों में सुमार कर दिया.

ऐसे बनाया विप्रो को देश की दिग्गज कंपनी

अजीम प्रेमजी के पिता दूरदर्शी प्रेमजी ने 1970 में साबुन-तेल छोड़कर सॉफ्टवेयर का रुख किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.दूरदर्शी प्रेमजी ने 70 के दशक में आईटी क्षेत्र का रुख किया. वह अमेरिकन कंपनी सेंटिनल कंप्यूटर कॉरपोरेशन के साथ जुड़े. चिप और मिनी कंप्यूटर निर्माण के क्षेत्र में उनकी दिलचस्पी बढ़ी. प्रेमजी ने 1980 में आईटी कंपनी विप्रो की नींव रखी जो आज भारत की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है.

अजीम प्रेमजी पारिवारिक मूल्यों को अहमियत देने वाले शख्स हैं.उनके पिता की 1966 में अकस्मात मृत्यु हो गई जिसके बाद उन्होने अपनी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री को बीच में ही छोड़ दिया और परिवार को संभालने का फैसला किया.

21 साल में ही संभाल ली थी कंपनी-

21 साल में कंपनी को संभालने का फैसला करना और ऐसा करना काफी मुश्किल था यहीं कारण है कि उनके रिश्तेदारों ने उनकी काबिलियत पर संदेह जताया. रिश्तेदारों का कहना था कि अगर अजीम प्रेमजी ने कंपनी को संभाला तो कंपनी बंद हो जाएगी.लेकिन हुआ उसका उल्टा उन्होंने कंपनी को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया.

30 साल बाद हासिल की डिग्री-

कंपनी को ऊंचाईयों तक पहुंचाने के बाद वो 30 साल बाद स्टैनफोर्ड लौटे और अपनी पढ़ाई पूरी कर डिग्री हासिल की.प्रेमजी सादगी पसंद करने वाले शख्स है.वो अभी भी अपनी पुरानी टोयोटा कोरोला कार में ही सफर करते हैं.इतना ही नहीं वो ज्यादातर इकोनॉमी क्लास में सफर करना पसंद करते हैं. उन्हें कई बार इकोनॉमी क्लास में सफर करते देखा भी गया है.
कामकाज के सिलसिले के दौरान भी वह आलीशान होटल की जगह कंपनी के गेस्टहाउस में ठहरना पसंद करते हैं. ऑफिस में किसी भी समारोह के दौरान भी वह फिजूलखर्ची से बचते हैं.

अजीम प्रेमजी का पाकिस्तान कनेक्शन-

अजीम प्रेमजी के बारे में दिलचस्प बात यह है कि अजीम प्रेमजी उस फैमिली से आते हैं, जिसने बंटवारे के दौर में पाकिस्‍तान के फाउंडर मुहम्मद अली जिन्‍ना (Muhammad Ali Jinnah) के फाइनेंस मिनिस्टर बनाने के ऑफर को ठुकराकर भारत में रहना पसंद किया था. 

यह ऑफर अजीम प्रेमजी के पिता मोहम्‍मद हाशिम प्रेमजी को मिला था.हाशिम प्रेमजी अपने दौर में चावल और कुकिंग ऑयल के मशहूर कारोबारी हुआ करते थे. उन्‍हें राइस किंग ऑफ बर्मा कहा जाता था.कॉरपोरेट जगत में वह इसी नाम से मशहूर थे.

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