14 की उम्र में बनीं Motivational Speaker, 18 की उम्र में हारी जिंदगी की जंग, ये है 'The Sky Is Pink' की असली नायिका….

नई दिल्ली. प्रियंका चोपड़ा, जायरा वसीम और फरहान अख्तर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है.

‘The Sky Is Pink’ आयशा चौधरी नाम की एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो पल्मोनरी फाइब्रोसिस नामक फेफड़े के गंभीर रोग से ग्रस्त होने के बावजूद एक सफल मोटिवेशनल स्पीकर है. ये कहानी ऐसी लड़की की है जिसने विरोधी परिस्थितयों से लड़कर सभी के लिए प्रेरणादायक बनी.

गंभीर बीमारी से जूझ रही आयशा को दुनिया से गए हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी लोग उसे याद कर रहे हैं. छोटी-सी उम्र को बड़ा करके जीने वाली आयशा चौधरी अपने जीवन से लाखों को प्रेरित करके चली गईं.

गुरुग्राम की रहने वाली 13 साल की मोटिवेशनल स्‍पीकर आयशा चौधरी को जन्म के समय से ही SCID (Severe Combined Immuno-Deficiency) नाम की बीमारी थी. जब वो सिर्फ 6 महीने की थीं, तब उनका बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट हुआ था. इसके साथ pulmonary fibrosis का खतरा बना होता है. फिर 13 साल की उम्र में pulmonary fibrosis नामक बीमारी हो गई थी

ये वो बीमारी है जो फेफड़ों के टिशू को प्रभावित करती है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है. 2010 में आयशा जब 13 साल की हुईं तब इस बीमारी का पता चला.

वो बहुत जल्दी थक जाती थी. वो धीरे काम करती थी उसे मदद की जरूरत होती थी. जल्द ही आयशा को स्कूल भी छोड़ना पड़ा. लेकिन वो रुकी नहीं. महज 14 साल की उम्र में आयशा motivational speaker बन गईं.

आयशा ने कई बड़े प्लेटफार्म पर प्रेरणादायक भाषण दिए. 2011 और 2013 के INK सम्मेलनों में भी आयशा स्पीकर रहीं. 2013 में TEDxPune में भी आयशा ने भाषण दिया था. 2015 में 18 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.

ये वो दौर था जब आयशा घुटन भरी जिंदगी को बहुत करीब से महसूस कर रही थीं, सोचकर देखिए, वो जिन्दगी जहां सांस लेना मुश्किल हो. फिर भी वो मुस्कुरा रही थीं.

तीन फरवरी 2014 को जब आयशा महज 17 साल की थीं, उसने TedX में बोलते हुए कहा कि मेरी कहानी बहुत सारे लोगों से अलग है. मेरी जिन्दगी बहुत कठिन है, कई स्लीपलेस नाइट मैंने बिताई हैं. लेकिन मैंने ऐसा सोचा कि मैं अकेली नहीं हूं इस घुटन के संसार में.

आयशा को ऑक्सीजन का सिलेंडर अपने साथ लेकर घूमना पड़ता था. उसे पेंटिंग और लिखना बहुत पसंद था.

आयशा की सेहत जब बहुत गिरने लगी तो उसने बेड पर लेटे-लेटे ही लिखना शुरू कर दिया था. वो कम से कम 5000 शब्द रोज लिखती थीं. उनके इन्हीं लेखों ने एक किताब का रूप ले लिया. उसकी किताब ‘My Little Epiphanies‘ उनकी मौत से कुछ घंटे पहले ही छपकर आई थी. उनकी किताब आज भी लोगों को प्रेरित कर रही है.

द स्काई इज पिंक बायोग्राफिकल ड्रामा है जिसका निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर शोनाली बोस कर रही हैं. इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा 22 साल की महिला से 60 साल तक की महिला के रोल में नजर आएंगी.

द स्काई इज पिंक प्रेरक वक्ता आयशा चौधरी के परिवार पर आधारित है, जिनकी मृत्यु पल्मोनरी फाइब्रोसिस नाम की बीमारी की वजह से मात्र 18 साल की उम्र में साल 2015 में हो गई थी

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