Manisha Kulshreshtha

के.के. बिरला फाउंडेशन ने गुरुवार को हिन्दी की जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को साल 2018 का ‘बिहारी पुरस्कार’ दिए जाने की घोषणा की है. ये पुरस्कार कुलश्रेष्ठ को वर्ष 2008 से 2017 के बीच प्रकाशित किताबों में से सर्वश्रेष्ठ पुस्तक ‘स्वप्नपाश’ के लिए दिया जा रहा है. यह घोषणा बिरला फिउंडेशन ने विज्ञप्ति जारी कर की.


मनीषा कुलश्रेष्ठ (Facebook image)

के.के. बिरला फाउंडेशन द्वारा बताया गया कि हिन्दी और राजस्थानी लेखक नंद भारद्वाज की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय समिति ने मनीषा कुलश्रेष्ठ को 28वां बिहारी पुरस्कार देने का निर्णय लिया है. समीति के अन्य सदस्यों में जनसत्ता के पूर्व संपादक ओम थानवी, हेमंत शेष, अल्का सरावगी, मुरलीधर वैष्णव और डॉ सुरेश ऋतुपर्ण शामिल हैं.

राजस्थान के जोधपुर में 26 अगस्त,1967 को जन्मीं कुलश्रेष्ठ को पुरस्कार में ढाई लाख रुपये की राशि, एक प्रशस्ति पत्र और एक प्रतीक चिह्न भेंट किया जाएगा.

कुलश्रेष्ठ के कई कहानी संग्रह और उपन्यास छप चुके हैं. हाल ही में उनका उपन्यास ‘मल्लिका’ काफी चर्चित हुआ. बिरजू महाराज पर भी उन्होंने ‘बिरजू लय’ के नाम से एक पुस्तक लिखी है.

मनीषा को इससे पहले राजस्थान साहित्य अकादमी का रांगेय राघव पुरस्कार, वनमाली पुरस्कार, घासीराम वर्मा सम्मान सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं.

क्यों पढ़ें ये उपन्यास

‘स्वप्नपाश’ की नायिका स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित है. बेहद जटिल भावभूमि पर लिखा गया ये उपन्यास मानसिक रोग से पीड़ित नायिका की परेशानियों, उसकी संवेदनाओं और मतिभ्रम से जन्मी कई पहलुओं को सामने लाता है.

किसे मिला है ये पुरस्कार

ये पुरस्कार राजस्थान में जन्में किसी लेखक को दिया जाता है. इस पुरस्कार की शुरुआत 1991 में हुई थी. अब तक नंद किशोर आचार्य, नंद चतुर्वेदी, प्रभा खेतान, विजय दानदेथा, गिरधर राठी आदि को यह पुरस्कार मिल चुका है.