दिल्ली का 2020ः 1993 में पहली बार हुआ था विधानसभा चुनाव, BJP को बदलने पड़े थे तीन सीएम

पांच साल के कार्यकाल में भाजपा को बदलने पड़े थे तीन मुख्यमंत्री

नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.). चुनाव आयोग ने सोमवार को दिल्ली में विधानसभा चुनावों से जुड़े मतदान कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. मतदान 08 फरवरी को होगा और नतीजे 11 फरवरी को आएंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि दिल्ली में एक ही चरण में मतदान होगा. अधिसूचना 14 जनवरी को जारी होगी. नामांकन 21 जनवरी तक कर सकते हैं. नामांकन की जांच 22 जनवरी को होगी. 24 जनवरी तक नाम वापस ले सकते हैं. मतदान 8 फरवरी तारीख को होगा. नतीज़े 11 फरवरी मार्च को आयेंगे.

दिल्ली में पहली बार 1993 में विधानसभा चुनाव हुए थे और तब भाजपा जीतकर सत्ता पर काबिज हुई थी. दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं. सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने सत्ता को बचाए रखने की चुनौती है. केजरीवाल अपने पांच साल के कामकाज को लेकर चुनावी मैदान में उतरे हैं.

भाजपा दिल्ली में करीब 21 साल से सत्ता का वनवास झेल रही है, ऐसे में सत्ता में वापसी के लिए हरसंभव कोशिश में पार्टी जुटी है. 2015 में दिल्ली के चुनावी कार्यक्रम की बात करें तो 12 जनवरी 2015 को चुनावों की घोषणा हुई थी. मतदान 07 फरवरी 2015 को हुआ था और वोटों का रिजल्ट 10 फरवरी 2015 को आया था.

2015 का चुनाव परिणाम
दिल्ली में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं और बहुमत के लिए 36 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए. 2015 के चुनावी नतीजों की बात करें तो आप ने बंपर जीत हासिल की थी. आप के खाते में 67 सीटें और 54.34% वोट शेयर आया था.

किरन बेदी के नेतृत्व चुनाव लड़ने वाली भाजपा को तीन सीटें मिली थी और लेकिन बीजेपी 32.19% वोट शेयर पर कब्जा जमाया था. कांग्रेस का इस चुनाव में खाता भी नहीं खुला था. कांग्रेस की झोली में 9.65% वोट शेयर आया था.

दिल्ली में 2019 लोकसभा के नतीजे
दिल्ली में विधानसभा की सात सीटं हैं, 2019 में मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने सातों सीटों पर कब्जा जमाया था. वोट शेयर की बात करें तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को 56.86%, कांग्रेस को 22.63% और आम आदमी पार्टी को 18.2% वोट मिले थे.

कब-कब किसकी सरकार
दिल्ली के चुनावी इतिहास की बात करें तो साल 1993 में भाजपा ने मदन लाल खुराना के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. लेकिन पांच साल के कार्यकाल में भाजपा को अपने तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े थे.

साल 1993 से 1996 तक खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद कुर्सी पर बैठे साहिब सिंह वर्मा 1996 से 13 अक्टूबर 1998 तक मुख्यमंत्री रहे. 13 अक्टूबर 1998 से 3 दिसंबर 1998 सुषमा स्वराज दिल्ली की गद्दी संभाली.

इसके बाद साल 1998 से दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं कांग्रेस नेता शीला दीक्षित जिन्होंने लगातार तीन चुनाव जीते. 2003 और 2008 के चुनाव में भी शीला दीक्षित ने सरकार बनायी.

2013 में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकरा बनायी जो महज दो साल ही चली. 2015 में हुए चुनाव में अर्विंद केजरीवाल ने बंपर जीत दर्ज की. वर्तमान में दिल्ली विधान सभा की 70 सीटों में 62 पर आप, 04 पर भाजपा और 04 सीट रिक्त है.

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हिन्दुस्थान समाचार /प्रतीक

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