AMERICA-CHINA होंगे आमने सामने, ये है वजह

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के लिए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखा है. अमेरिका के इस कदम से चीन की बेचैनी बढ़ सकती है. इसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है.

इसी महीने चीन ने मसूद अजहर पर बैन लगाने के प्रस्ताव को यूएन की सुरक्षा परिषद की बैठक में वीटो का प्रयोग कर अटका दिया था. चीन के इस कदम से नाराज होकर ही अमेरिका ने अजहर को ब्लैकलिस्ट करने के लिए सीधे सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है.

वहीं अमेरिका के इस प्रस्ताव को फ्रांस और ब्रिटेन का समर्थन भी हासिल है. इससे पहले भी दोनों राष्ट्रों ने अमेरिका का साथ दिया था.

बता दें कि कश्मीर में 14 फरवरी को हुए जैश के आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हुए थे. वहीं इस हमले के बाद भारत और पाक के बीच तनाव में भी बढ़ोतरी हुई है. वहीं सुरक्षा परिषद में पेश हुए प्रस्ताव में भी इस घातक हमले की निंदा की गई है.

वहीं अगर इस प्रस्ताव के बाद अगर यूएन से प्रतिबंध लग जाता है तो जैश सरगना मसूद अजहर की विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध लग जाएगा. कार्रवाई के तहत ही उसकी संपत्तियों पर भी गाज गिर सकेगी. इसकी संपत्तियों को जब्त किया जा सकेगा.

वोटिंग कब होगी जानकारी नहीं

अभी इस बारे में जानकारी नहीं है कि ड्रॉफ्ट रिजॉलूशन पर वोटिंग कब होगी. एक्सपर्टस यह अनुमान जरूर लगा रहे हैं कि पिछली बार की तरह चीन इस बार भी इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल कर सकता है.

बता दें कि स्थायी सदस्य के तौर पर ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, रूस और चीन शामिल हैं. यह सभी देश वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं.

चार बार हो चुके प्रयास

यह पहला मौका नहीं है जब मसूद अजहर को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की जा रही है. और इसके लिए चार बार प्रयास भी हो चुके हैं. चीन इन चार कोशिशों में से तीन बार वीटो का प्रयोग अडंगा लगा चुका है. इस बार भी होल्ड पर लगने के बाद यह प्रस्ताव 9 महीने के लिए होल्ड पर है.

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