कामाख्या मंदिर का प्रसिद्ध मेला शुरू, इस दौरान रजस्वला में रहती हैं मां कामाख्या देवी

असम के नीलाचल पहाड़ पर स्थित विश्व विख्यात शक्तिपीठ कामाख्या धाम में शनिवार से ऐतिहासिक अंबुवाची मेला शुरू हो गया है. ये मेला कामाख्या धाम का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है जिसमें देश-विदेश से लाखों भक्तों का आगमन होता है. देवी के 51 शक्तिपीठों में से ये भी एक है.

बता दें कि हर साल 22 से 26 जून तक कामाख्या देवी मंदिर में अंबुवाची मेला शुरू हो जाता है जो पांच दिनों तक चलता है. मान्यता है कि तीन दिन तक माता रजस्वला रहती हैं. चौथे दिन देवी के स्नान पूजा के बाद मंदिर के कपाट खुल जाते हैं. इसके बाद भक्तों को प्रसाद में गीला कपड़ा मिलता है, जो अंबुबाची वस्त्र कहलाता है. कहा जाता है कि माता जब रजस्वला होती हैं तो मंदिर के अंदर सवेद वस्त्र बिछाते हैं, तीन दिन बाद वो वस्त्र लाल हो जाता है. इस दौरान देश के विभिन्न जगहों से यहां तंत्रिक और साधक भी जुटते हैं.

क्या है इस मंदिर की खासियत

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को अपने सुदर्शन चक्र से काटा, तो उनके शरीर के 51 हिस्से धरती पर गिरे थे. वो टुकड़े जहां-जहां पर गिरे, वहां-वहां देवी के शक्तिपीठ स्थापित हुए. माता के योनी का भाग जहां पर गिरा वो कामरूप कहलाने लगा. बाद में ये कामाख्या शक्तिपीठ के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गया.

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