साइबर वर्ल्ड के जरिए चला रहे थे भारत विरोधी मुहिम

नई दिल्ली. राजधानी में साइबर अपराध करने वालों दो आरोपितों ने पुलिस पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वह डॉस व रैनसमवेयर सॉफ्टवेयर के जारिए हैकिंग करते रहे हैं. आरोपित इस तकनीक का उपयोग सुरक्षा एजेंसियों की सूचनाएं लेने और बड़ी कंपनियों को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए कर रहे थे. आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि इनका मकसद भारत को निशाना बनाना है और भारत विरोधी कैंपेन चलाना है.

साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो अलग-अलग साइट्स को हैक कर ये पढ़े लिखे नौजवानों का ब्रेनवॉश कर उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल करने में लगे हुए थे.

इन साइट्स में कई सरकारी व गैर सरकारी साइट्स या फिर उनसे मिलती-जुलती नकली साइट्स बनाकर उन्हें सोशल नेटवर्किंग के जरिये इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था. इसमें ‘थर्ड आई हैकर्स ग्रुप’ ब्लैक लीट्स, पाकिस्तान साइबर आर्मी, पाकिस्तान साइबर थर्ड्स, टीम लीट्स नाम के ग्रुप का इस्तेमाल कर सैकड़ों भारतीय साइट्स को हैक किया और इन साइट्स पर भारत विरोधी स्लोगन लिखा गया और कैंपेन चलाया.

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार उक्त साइट की जांच करने पर पता चला कि ‘डी डॉस’(डिनायल ऑफ सर्विस) अटैक का मतलब है किसी भी साइट्स पर उसकी जरूरत से ज्यादा ट्रैफिक बढ़ाते हुए पहले उसके सर्वर को कम करना फिर सॉफ्टवेयर के जरिये उस साइट्स की कमांड अपने कब्जे में लेना. रैनसमवेयर एक मालवेयर टूल है| इसका इस्तेमाल संचार सिस्टम को बाधित करने के लिए कम्पयूटर, लैपटॉप व अन्य तकनीकी माध्यमों को करना है. इसके जरिये मई, 2017 में एक वैश्विक स्तर पर हमला भी हुआ था.

रैनसम अंग्रेजी शब्द मतलब है- फिरौती. इसलिए इस साइबर हमले को फिरौती के लिए हमला करने वाला मालवेयर भी कहते हैं.

गत सप्ताह साइबर सेल द्वारा पकड़े गए जावेद अहमद और निसार खान नामक आरोपितों ने पूछताछ में अपराध कबूलते हुए बताया है कि वह साइबर वर्ल्ड के जरिए भारत के खिलाफ मुहिम चला रहे थे. दोनों को दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने गुप्त सुचना के आधार पर निजामुद्दीन से गिरफ्तार किया था.

हिन्दुस्थान समाचार /अश्वनी शर्मा

%d bloggers like this: