एक क्रांतिकारी कदम

उमेश चतुर्वेदी 

सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन संविधान की किताबों में न दिखने वाले विवादित अनुच्छेद 35ए को क्या हटाने की दिशा में केंद्र सरकार एक कदम आगे बढ़ रही है? यह सवाल इसलिए उठने लगा है, क्योंकि 28 फरवरी को कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल की अनुशंसा पर धारा 370 की उपधारा में एक में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.

यह संशोधन एक अध्यादेश के जरिए किया जाना है. इस अध्यादेश में जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन की बात कही गई है.

इस अध्यादेश के लागू होने के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा की तरह ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों और व्यवसायिक कॉलेजों में तीन प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. इससे 350 गांवों के करीब तीन लाख लोगों को फायदा होगा.

वैसे यह जान लेना चाहिए कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण देने के लिए अध्यादेश के जरिए धारा 370 के उपबंध एक में संशोधन की मंजूरी क्यों दी है?

दरअसल धारा 370 के ही कारण केंद्र की ओर से पारित कोई भी कानून राज्य की विधानसभा की मंजूरी के बिना राज्य में लागू नहीं हो सकता. एससी-एसटी और ओबीसी रिजर्वेशन एक्ट अब तक यहां लागू नहीं हो सका था.

लेकिन इस संशोधन के बावजूद राज्य की सहमति के बिना भी यह कानून जम्मू-कश्मीर में भी लागू होगा.जबकि यह कानून अभी तक यहां लागू नहीं था. मोदी कैबिनेट ने जिस अध्यादेश को मंजूरी दी है, उसे जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) अध्यादेश 2019 नाम दिया गया है.

इसके तहत जो लोग अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहते हैं, उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिलेगा.इसकी घोषणा करते वक्त वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि 2004 से अब तक केवल नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों को ही आरक्षण का लाभ मिलता था.

इस साल जनवरी में केंद्र सरकार ने सवर्ण तबके के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी दी थी.

इसे तमाम राज्य अपने फैसलों से लगातार लागू कर रहे हैं. लेकिन जम्मू-कश्मीर राज्य में ऐसा नहीं हो रहा था. मोदी कैबिनेट ने 28 फरवरी की अपनी बैठक में संविधान संशोधन आदेश (एप्लीकेशन टू जम्मू एंड कश्मीर) 2019 को भी मंजूरी दे दी.

इसकी जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इसके तहत जम्मू और कश्मीर में मौजूदा आरक्षण के अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों को शैक्षिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा.

पढ़े पूरा लेख युगवार्ता के 17 मार्च के अंक में… 

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