Air Force Day: वो मौके जब भारतीय वायुसेना ने दिखाया पराक्रम

IAF 88th Foundation Day
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8 अक्टूबर 1932, वो दिन जब देश के आसमानी लड़ाकुओं की एक टीम तैयार हुई. 6 पायलट और 19 वायुसैनिकों के साथ भारतीय वायुसेना ने आसमान के रास्ते देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई. शुरुआत में वायुसेना में 4 वेस्टलैंड वापिती बाइप्लेन्स थे. अपने जज्बे और साहस की वजह से भारतीय वायुसेना आज दुनिया की सबसे खतरनाक वायुसेनाओं में से एक है. द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय वायुसेना की बहादुरी का लोहा पूरी दुनिया ने माना.

द्वितीय विश्व युद्ध में जब जापानी सेना बर्मा की तरफ बढ़ रही थी तब भारतीय वायुसेना ने ना सिर्फ उसका रास्ता रोका, बल्कि भागने पर भी मजबूर किया. इस युद्ध के हीरो थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्जन सिंह. जो बाद में एयर मार्शल बने. 1947 में देश जब आजाद हुआ तो उसे विभाजन का दर्द भी झेलना पड़ा. इस पीड़ा से भारतीय वायुसेना भी बच नहीं सकी. बंटवारे में दो स्क्वाइड्रन को पाकिस्तान जाना पड़ा.

बंटवारे के समय कबिलाइयों ने पाकिस्तान की मदद से जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया था. इस अघोषित युद्ध के समय भारतीय वायुसेना ने कश्मीरियों को सुरक्षित बाहर निकालकर हीरो बन गई थी. भारतीय वायुसेना की बहादुरी का अंदाजा सिर्फ इससे निकाला जा सकता है कि दूसरे मुल्कों पर जब भी कोई खतरा आया तो उसने भारतीय वायुसेना को मदद को बुलाया. 1960 में कांगों में शांति स्थापित करने की बात हो या 1971 में बांग्लादेश की आजादी. 1987 में श्रीलंका का सिविल वार हो या 1988 में मालदीव में सत्ता परिवर्तन को बचाना हो. सभी ने भारतीय वायुसेना से ही मदद मांगी.

1960 में कॉन्गो से बेल्जियम का शासन खत्म हुआ. इसके बाद पूरे कॉन्गो में हिंसा और विद्रोह होने लगा. कॉन्गो की सरकार ने भारत से मदद मांगी. और जैसे ही भारतीय वायुसेना कॉन्गो पहुंची विद्रोहियों को बोलती बंद हो गई. अखंड भारत के सपने में पुर्तगाली रोड़ा बन रहे थे. वे गोवा को आजाद करने पर राजी नहीं थे. लेकिन 1961 में भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन विजय के सामने वे टिक नहीं सके. और गोवा भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया.

1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया. लेकिन भारतीय वायुसेना के हाथों पिट के भागना पड़ा. 1971 में उसने फिर से गलती की, और ये उसकी बड़ी गलती साबित हुई. इस युद्ध में उसे पूर्वी पाकिस्तान को गंवाना पड़ा. जो बांग्लादेश के नाम से स्वतंत्र देश बन गया. 1984 का ऑपरेशन सियाचिन हो या 99 में कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद चादर देश के सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना के योगदान की गाथा बताते हैं.

बालाकोट एयर स्ट्राइक से दुश्मन हमारी तरफ देखने से भी डरने लगा है. आज भारतीय वायुसेना के बेड़े में 1720 से ज्यादा विमान हैं और 2 लाख के करीब वायुसैनिक हैं. भारतीय वायुसेना की दम पर ही अखंड भारत का संकल्प कायम है. वरना दुश्मन कब का हमारी जमीन पर कब्जा कर लिए होते और हम फिर से गुलाम हो गए होते.