Bihar- 1 हफ्ते के अंदर गया में 22 नए केस, 6 बच्चों की मौत

  • गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में 22 बच्चों को भर्ती कराया गया था. जिनमें से छह बच्चों की मौत हो चुकी है
  • एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस)) का मामला हो सकता है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है

नई दिल्ली. बिहार में दिमागी बुखार का कहर अभी तक जारी है. मुजफ्फरपुर के बाद अब गया में चमकी बुखार का कहर जारी है. यहां 2 जुलाई से अब तक 6 बच्चों की मौत हो गई है.

दो जुलाई को गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में 22 बच्चों को भर्ती कराया गया था. जिनमें से छह बच्चों की मौत हो चुकी है.

अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि 2 जुलाई के बाद से अब तक 22 मरीजों को भर्ती किया गया है, जिसमें 6 बच्चों की मौत हुई है.

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी के प्रसाद ने कहा, ये बताया जा रहा है कि ये एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस)) का मामला हो सकता है लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है, रिपोर्ट की प्रतीक्षा है. रिपोर्ट आने के बाद इसका पता चलेगा.

इनमें से 119 की मौत श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) और 21 मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई हैं. इस बीमारी को बिहार में दिमागी बुखार और चमकी बुखार भी कहा जाता है.

बिहार सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की टीमें बच्चों की मौत के असल कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन इसकी असल वजह का पता नहीं चल पा रहा है.

15 वर्ष तक की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं और मरने वाले बच्चों में से अधिकांश की उम्र एक से सात साल के बीच है. इस वर्ष अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की मौत एईएस से हो चुकी है.

एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से मुजफ्फरपुर में अब तक कुल 132 बच्चों की मौत हो चुकी है. एसकेएमसीएच में 111 और केजरीवाल अस्पताल में 21 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश के 40 जिलों में से करीब 20 जिलों में इस बार एईएस से करीब 600 बच्चे प्रभावित हुए जिनमें से करीब 140 की मौत हो गई.

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