जानिए APOLLO MISSION से जुड़ी कुछ रोचक बातें

50 साल पहले नासा ने अपोलो-11 मिशन के चलते पहली बार चांद पर किसी इंसान को भेजा था. इस मिशन के साथ ही नील आर्मस्ट्रांग चांद पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति बन गए थे. उनके बाद बज एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले दूसरे और माइकल कॉलिंस तीसरे अंतरिक्ष यात्री बन गए थे.

मिशन से जुड़े थे 4 लाख लोग

इस ऐतिहासिक मिशन में करीब 4 लाख लोग जुड़े हुए थे जिसमें चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों से लेकर मिशन कंट्रोलर, ठेकेदार, कैटरर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, नर्सें, डॉक्टर, गणितज्ञ और प्रोग्रामर थे. वहीं करीब 53 करोड़ लोगों ने इसे लाइव देखा था जो उस वक्त की करीब 15 फीसदी आबादी थी.

मिशन की सफलता में महिलाओं का रहा अहम रोल

अपोलो मिशन की सफलता में महिलाओं का अहम योगदान रहा. नासा ने डेटा प्रोसेसिंग और जटिल गणना के लिए अफ्रीकी-अमेरिकी गणितज्ञ महिलाओं को ‘मानव कंप्यूटर’ के तौर पर नियुक्त किया था जिनमें महिला कैथेरीन जॉन्स ने अपोलो लूनर मॉड्यूल और कमांड मॉड्यूल के लिए भी प्रेक्षेपण पथ की गणना की थी. 2016 में आई फिल्म ‘हिडन फिगर्स’ अपोलो मिशन में शामिल महिलाओं की कहानी पर ही बनी है.

चांद पर पहुंचने वालों की बदल गई थी जिदंगी

अब तक चांद पर 12 लोगों ने कदम रखा है. ज्यादातर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. चांद पर कदम रखने वाले दूसरे अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन तो डिप्रेशन में चले गए थे.

नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने मांगी थी इंदिरा गांधी से माफी

नील आर्मस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) ने जब 20 जुलाई को चांद पर कदम रखा था तो इसे देखने के लिए दिवंगत भूतपूर्व पीएम इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) सुबह 4.30 बजे तक जागती रही थीं. जब नील को इस बारे में सूचित किया गया तो उन्होंने इसके लिए खेद व्यक्त किया था.

चंद्रमा से धरती पर लौटने के बाद जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) अपने सहयोगी अंतरिक्ष यात्री के साथ अपनी विश्व यात्रा के तहत नई दिल्ली में इंदिरा गांधी से मिले, तो उन्होंने कहा था, ‘मैं खेद व्यक्त करता हूं. अगली बार, मैं सुनिश्चित करूंगा कि जब हम चंद्रमा पर उतरें तो आपको इतना न जागना पड़े.’

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