पालघर लिंचिंग: आरोप पत्र नहीं दाखिल होने से 28 को मिली जमानत

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मुंबई. पालघर हिंसा मामले में 90 दिनों तक कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण एक स्थानीय अदालत ने 28 आरोपियों को जमानत दे दी है.

बता दे कि 16 अप्रैल को पालघर में भीड़ ने चोरी के शक में दो साधुओं और उनके ड्राइवर पर हमला बोल दिया था. भीड़ ने तीनों को पीट पीटकर मार डाला था.

दहानू के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एमवी जावले ने आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के चलते मामले के 28 आरोपियों की रिहाई का आदेश दिया. सरकारी वकील अमृत अधिकारी ने बताया कि पहली दो एफआईआर के आधार पर पुलिस ने इन 28 लोगों को गिरफ्तार किया था.

हालांकि अधिकारी ने बताया कि इनमें से 18 लोगों को वापस हिरासत में लिया जाएगा क्योंकि इनका नाम उन 47 लोगों में शामिल है जिनके खिलाफ पुलिस को रोकने, दंगा भड़काने और हत्या के प्रयास के लिए एक अन्य आरोप पत्र दाखिल हुआ है.

पुलिस ने भीड़ हिंसा के इस मामले में कुल 154 लोगों को गिरफ्तार किया था. आरोपपत्र के मुताबिक, सीआईडी ने अपनी जांच में माना कि पालघर साधु हत्याकांड के पीछे कोई सांप्रदायिक कारण नहीं था बल्कि अपवाह को इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड की मुख्य वजह बताया गया.

सीआईडी के अनुसार इस इलाके में कुछ दिनों से ऐसी अफवाह थी कि “अपराधी बच्चों को किडनैप कर उनके शरीर से किडनी निकालने के लिए साधु के भेष में आ सकते हैं. इसी अफवाह के चलते भीड़ ने इन संतों को किडनैपर समझकर साधुओं पर जानलेवा हमला किया था.

बता दे कि महाराष्ट्र सरकार ने साधुओं की हत्या और मॉब लिंचिंग के लिए सांप्रदायिक कारण को पहले ही खारिज कर दिया था. बता दे कि पालघर के गड़चिंचले गांव में 16 अप्रैल की रात को हुई घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. जिसमें 65 वर्षीय महंत भीड़ से अपनी जान बचाने के लिए पुलिस का हाथ थामे चल रहे थे लेकिन पुलिसकर्मी ने इनका हाथ छुड़वाकर कथित रूप से उन्हें भीड़ को सौंप दिया. इसके बाद इस भीड़ ने जूना अखाड़े के दो साधुओं महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष), महंत महाराज कल्पवृक्ष गिरी (65) और उनके 30 वर्षीय ड्राइवर निलेश तेलगडे की पीट-पीटकर हत्या कर दी. यह घटना उस वक्त हुई थी जब वे सभी एक कार से सूरत में अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने जा रहे थे.

हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र