दिल्ली का 2020: रोहिणी विधानसभा सीट पर एक नजर, इन मुद्दों का जनता चाहती है समाधान

  • यहां के पहले चुनाव में बीजेपी के जयभगवान अग्रवाल ने कांग्रेस के विजेंदर जिंदल को हराया और विधायक बने. 2013 के चुनाव में इस क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के राजेश गर्ग विधायक चुने गए
  • 1980 में डीडीए ने इस इलाके में आलीशान कॉलोनियों का निर्माण कराया और यहां के लोगों को आवंटित किया. इस इलाके में कई नामी शॉपिंग सेंटर्स समेत बड़े बाजार भी हैं

नई दिल्ली. दिल्ली में चुनावी शंखनाद के साथ ही सियासी गहमागहमी शुरू हो गई है. सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां अपनी रणनीति तैयार कर चुकी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. 8 फरवरी को वोटिंग है और 11 फरवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे.

  • रोहिणी विधानसभा सीट पर एक नजर
  • 2002 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में विधानसभा बना
  • उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आने वाली रोहिणी विधानसभा सीट दिल्ली की 70 सीटों में सबसे ज्यादा
  • महत्वपूर्ण सीटों में से एक है.

रोहिणी, दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020

यहां के पहले चुनाव में बीजेपी के जयभगवान अग्रवाल ने कांग्रेस के विजेंदर जिंदल को हराया और विधायक बने. 2013 के चुनाव में इस क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के राजेश गर्ग विधायक चुने गए.

2015 के चुनाव में बीजेपी के विजेंदर कुमार विधायक बने. बीजेपी के बिजेंद्र गुप्ता को 59866 वोट मिले थे. आम आदमी पार्टी के सीएल गुप्ता को 5367 वोटों से हराया था.

इस विधानसभा में 174653 मतदाता हैं जिनमें 91362 पुरुष और 83281 महिला हैं.मेट्रो की रेड लाइन से जुड़ने वाला ये इलाका पॉश कॉलोनियों में गिना जाता है.

1980 में डीडीए ने इस इलाके में आलीशान कॉलोनियों का निर्माण कराया और यहां के लोगों को आवंटित किया. इस इलाके में कई नामी शॉपिंग सेंटर्स समेत बड़े बाजार भी हैं.

2013 के चुनाव में इस क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक राजेश गर्ग को जीत हासिल हुई.

2015 विधानसभा चुनाव पर नजर
कुल वोट : 87,78,269
कुल सीट : 70
आप : 67
भाजपा : 03
कांग्रेस : शून्य

  • प्रमुख मुद्दे
  • अतिक्रमण भी प्रमुख समस्याओं में से एक है. कई कॉलोनियों के लोग इससे जूझ रहे हैं.
  • सार्वजनिक शौचालयों की हालत खस्ता है, जिसमें गंदगी की भरमार है.
  • पूरे क्षेत्र में पार्किंग की सबसे बड़ी दिक्कत, जो क्षेत्र का प्रमुख मुद्दा है.
  • बाजार से लेकर कॉलोनियों तक पार्किंग की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है.
  • पॉश कालोनियों को छोड़कर दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों में सीवर लाइन पुरानी होने के कारण जाम रहता है.
  • इससे जलजमाव की स्थिति पैदा होती है.
  • पानी की समस्या भी यहां काफी पुरानी है.
  • कई इलाकों में पानी का दवाब कम होने के कारण लोगों को इसकी किल्लत से जूझना पड़ता है.

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