अभी तक 1 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने भरा ITR, अब बचे हैं केवल 13 दिन फिर देना हो भारी भरकम जुर्माना

  • राजस्व विभाग ने बताया है कि 16 जुलाई तक 1 करोड़ लोगों से भी ज्यादा लोगों ने आईटीआर फाइल कर चुके हैं
  • विभाग के मुताबिक सुविधा के कारण रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है.

नई दिल्ली.पीएम मोदी टैक्स के कलेक्शन को बढ़ाने के लिए लगातार अहम कदम उठा रही है.यही कारण है कि मोदी सरकार आईटीआर फॉर्म को आसान बनाने में लगी हुई है और उसे लेकर कई बड़े बदलाव कर रही है. इसी बीच राजस्व विभाग ने बताया है कि 16 जुलाई तक 1 करोड़ लोगों से भी ज्यादा लोगों ने आईटीआर फाइल कर चुके हैं.

विभाग के मुताबिक सुविधा के कारण रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है. विभाग के अनुसार अभी तक कुल 1.46 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया है.

1.46 करोड़ लोगों ने फाइल किया आईटीआर-

आपको बता दें कि आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई है और इस दिन के बाद फाइलिंग पर जुर्माना लग सकता है. इस लिहाज से अब सिर्फ दिन का समय बचा है.राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1.46 करोड़ आईटीआर में से 90.8 लाख रिटर्न सालाना 50 लाख रुपए तक की कमाई करने वालों ने भरे हैं.

गर आप खुद आईटीआर फाइल करने की सोच रहे हैं तो उससे पहले आपको कुछ ऐसी बाते हैं जिनके बारे में जान लेना जरूरी है. ताकि आप गलतियां न करें. आज हम आपको ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनपर आपको खास ध्यान देना हैं.

इस बार आपको देनी होगी ज्‍यादा जानकारी

ऐसे में टैक्‍सपेयर्स को पहले के मुकाबले इस बार आयकर रिटर्न फॉर्म में अधिक जानकारियां देनी होंगी. फॉर्म में टैक्‍सपेयर्स से जो नई जानकारियां मांगी गई हैं, उनमें भारत में निवास के दिनों की संख्या, अनलिस्टेड शेयर्स की होल्डिंग और टीडीएस होने पर किरायेदार का पैन शामिल है.

ये होता है एआईआर-

एनुअल इंफॉर्मेशन रिटर्न (एआईआर) एक कारोबारी साल के दौरान हुए वित्‍तीय लेन-देन को वित्‍तीय संस्‍थानों को ही भरना होता है. एआईआर भरने की जिम्मेदारी उन संस्थाओं की होती है, जिनके जरिए आपने वित्तीय लेन-देन किया है. इन संस्‍थाओं की जिम्मेदारी ये भी होती है कि वह वित्तीय लेन-देन करने वाले व्यक्ति के पैन नंबर का उल्लेख करें. साथ ही उस व्यक्ति का पिन कोड सहित पूरा पता भी बताएं.वित्‍तीय संस्‍थान इनकम टैक्‍स विभाग को भेजते हैं ये सूचनाएं

बचत खाते में 10 लाख से अधिक जमा करना

जब एक साल के दौरान किसी व्यक्ति के बचत खाते में 10 लाख रुपए या इससे अधिक जमा होता है, तो उस बैंक की जिम्मेदारी होती है कि वह इसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को दे.

दो लाख रुपए से अधिक का बिल-

यदि किसी व्‍यक्ति ने एक साल में 2 लाख रुपए से अधिक क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान किया है़, तो क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक या संबंधित कंपनी को इसकी जानकारी इनकम टैक्‍स विभाग को देनी होती है.

म्युचुअल फंड की दो लाख रुपए से अधिक की खरीददारी-

किसी म्युचुअल फंड योजना में कोई व्‍यक्ति दो लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो उस म्युचुअल फंड के ट्रस्टी या ट्रस्टी की ओर से उस म्युचुअल फंड के कामकाज का प्रबंधन करने वाले व्यक्ति को ये सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देनी होती है.

बॉन्ड में 5 लाख रुपए से अधिक का निवेश-

यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी या संस्था की ओर से जारी किए गए बॉन्ड या डिबेंचर में पांच लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो उसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देने की जिम्मेदारी बॉन्ड या डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्था की होती है.

पब्लिक इश्यू में एक लाख से अधिक निवेश-

अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी के एक लाख रुपए या इससे अधिक राशि के शेयर पब्लिक इश्यू या राइट्स इश्यू के जरिए खरीदता है, तो शेयर जारी करने वाली कंपनी का उत्तरदायित्व होता है कि वह अथॉरिटीज को इसकी जानकारी दे.

30 लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद या बिक्री-

अगर कोई व्यक्ति 30 लाख रुपए या इससे अधिक कीमत की अचल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो रजिस्ट्रार/ सब-रजिस्ट्रार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह इसकी सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को दे.

आरबीआई के बॉन्ड में 5 लाख से अधिक का निवेश

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए बॉन्ड में कोई व्यक्ति अगर किसी एक साल के दौरान पांच लाख रुपए या इससे अधिक का निवेश करता है, तो आरबीआई की तरफ से इस काम के लिए नियुक्त व्यक्ति को यह सूचना इनकम टैक्स अथॉरिटीज को देनी होती है.

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